नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल आयोग (आईईसी) के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि दुनिया को 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को पांच गुना बढ़ाकर 11,000 गीगावाट करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह बात 100 से ज्यादा देशों के विशेषज्ञों के वैश्विक विद्युत मानक तय करने के लिए यहां एकत्रित होने के अवसर पर कही।
आईईसी अध्यक्ष जो कॉप्स ने यहां आयोग की 89वीं आम बैठक के उद्घाटन के अवसर पर कहा, ‘‘एक देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विनिर्मित सौर पैनल को दूसरे देश में भी विश्वसनीय रूप से कार्य करना चाहिए और ग्रिड इंटरकनेक्शन को सार्वभौमिक प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। इस साझा तकनीकी भाषा के जरिये हम मिलकर एक स्थायी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।’’
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने इस सम्मेलन को ‘तकनीकी प्रतिभा, नीतिगत बुद्धिमत्ता और संस्थागत नेतृत्व का असाधारण संगम’ बताया। यह तकनीकी भविष्य को आकार देने के लिए एक ‘ऐतिहासिक अवसर’ का प्रतिनिधित्व करता है।
खरे ने कहा कि भारत एक भागीदार से आईईसी के उपाध्यक्ष पद तक पहुंच गया है और 121 तकनीकी समितियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। इसके अलावा 51 अन्य समितियों में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त कर चुका है।
पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में 2,000 से अधिक विशेषज्ञ सौर फोटोवोल्टिक प्रौद्योगिकी, स्मार्ट ग्रिड और कृत्रिम मेधा संचालन व्यवस्था के लिए मानक विकसित करने के लिए एक साथ आएं हैं, जो दशकों तक ऊर्जा अवसंरचना को आकार देंगे।
कॉप्स ने दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हम यहां जो मानक विकसित कर रहे हैं, वे इस परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से सक्षम बनाएंगे।’’
भारत चौथी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 1960, 1997 और 2013 में भी इसकी मेजबानी कर चुका है। देश ‘लो वोल्टेज डायरेक्ट करंट’ के मानकीकरण के लिए वैश्विक सचिवालय के रूप में कार्य करेगा, जो स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए एक प्रमुख प्रौद्योगिकी है।
आईईसी का गठन 1906 में हुआ था। यह दुनिया भर के 30,000 विशेषज्ञों के नेटवर्क के माध्यम से विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और संबंधित तकनीकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक विकसित करता है।
भाषा रमण अजय
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