मुंबई, 23 अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगस्त में हाजिर मुद्रा बाजार से शुद्ध रूप से 43.26 अरब डॉलर की खरीद की। केंद्रीय बैंक के शुक्रवार को जारी मासिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।
इस डॉलर खरीद को विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा के लिए शुरू की गई विशेष डॉलर-रुपया अदला-बदली सुविधा से समर्थन मिला।
यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब आरबीआई ने हाजिर बाजार से शुद्ध रूप से डॉलर खरीदे। केंद्रीय बैंक ने जुलाई में 18.65 अरब डॉलर और जून में 56.1 करोड़ डॉलर की शुद्ध खरीद की थी। हालांकि, मई में उसने शुद्ध रूप से 6.10 अरब डॉलर की बिक्री की थी।
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, अगस्त में आरबीआई ने सकल आधार पर 74.47 अरब डॉलर खरीदे और 31.208 अरब डॉलर की बिक्री की।
आरबीआई ने कहा कि अगस्त 2026 में प्रवासी जमा के तहत शुद्ध प्रवाह में तेज वृद्धि हुई। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा की बढ़ोतरी का प्रमुख योगदान रहा, जिसे केंद्रीय बैंक की विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा से मदद मिली। इस वजह से अगस्त के अंत में कुल बकाया प्रवासी जमा में एफसीएनआर (बी) जमा की हिस्सेदारी में तेज वृद्धि हुई।
बुलेटिन के अनुसार, सितंबर 2026 की शुरुआत में एफसीएनआर (बी) जमा से मजबूत प्रवाह के कारण रुपये को समर्थन मिला। हालांकि, बाद में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से रुपये की ये बढ़त खत्म हो गई।
सितंबर के अंतिम हिस्से से अमेरिकी डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर गिरावट का दबाव रहा। अक्टूबर के मध्य में डॉलर की नरमी और सट्टेबाजी के लिए डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के आरबीआई के उपायों से रुपये को समर्थन मिला।
आरबीआई ने कहा कि आगे रुपये को मजबूत अमेरिकी डॉलर, आयात की बढ़ती लागत, पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति में उम्मीद से अधिक सख्ती भी रुपये पर दबाव डाल सकती है।
हालांकि, सेवा निर्यात में मजबूती, द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्थाओं में स्थिरता और विदेशी पूंजी का लगातार प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकते हैं।
इस बीच, शुक्रवार को रुपया लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 12 पैसे टूटकर 94.93 पर आ गया।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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