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Saturday, 7 March, 2026
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पीपीआई जारीकर्ता गैर-बैंकों पर नियमन के विकल्प तलाश रहा आरबीआई

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नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है कि प्रीपेड भुगतान उत्पादों (पीपीआई) के संबंध में गैर-बैंक वित्त प्रौद्योगिकी कंपनियों की गतिविधियों के कारण ग्राहकों को कोई जोखिम न हो।

सूत्रों ने कहा कि इसी हफ्ते पीपीआई के बारे में जारी आरबीआई के परामर्श का मकसद ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही बिना प्राधिकार या लाइसेंस के इस तरह की गतिविधि को रोकना भी है।

रिजर्व बैंक ने इस हफ्ते की शुरुआत में एक परामर्श जारी कर कहा कि पीपीआई जारी करने वाले गैर-बैंक अपने वॉलेट और कार्ड को ऋण-सुविधा या पूर्व-निर्धारित उधार सीमा से ‘लोड’ नहीं कर सकते हैं। इस चलन पर फौरन रोक लगाने और ऐसा नहीं करने पर दंडात्मक कार्रवाई की बात भी कही गई है।

सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई गैर-बैंक वित्त प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ पीपीआई के मुद्दे पर चर्चा कर रहा है और समुचित विकल्प की तलाश कर रहा है।

पीपीआई ऐसे उत्पाद हैं जो उसमें पहले से डाली गयी राशि के एवज में उत्पादों एवं सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और प्रेषण सुविधाओं की खरीद की सुविधा प्रदान करते हैं।

इस बीच, पीपीआई जारीकर्ता कंपनियों ने इस मामले में कम-से-कम एक साल का मोहलत देने की मांग की है। एक सूत्र के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में कई वित्त प्रौद्योगिकी कंपनियों का कारोबार पीपीआई की वजह से खूब बढ़ा है लेकिन अब बैंकिंग नियामक ने इस पर लगाम लगाने की पहल की है।

भारतीय डिजिटल ऋणदाता संघ (डीएलएआई) जैसे उद्योग संगठनों को आशंका है कि कार्ड को ऋण-सुविधा या पूर्व-निर्धारित उधार सीमा के जरिये पैसा नहीं डालने के निर्देश से उनके ग्राहक आधार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में उन्होंने एक साल तक मोहलत मांगते हुए कहा है कि इस दौरान वे अपने कारोबारी ढांचे को बदल पाएंगी।

सूत्रों ने कहा कि आरबीआई इस बारे में कोई भी नियमन मनमाने ढंग से लाने के पक्ष में नहीं है। लिहाजा पीपीआई जारी करने वाली गैर-बैंक वित्त प्रौद्योगिकी कंपनियों और अभी खरीदो बाद में भुगतान करो की सुविधा देने वाली बीएनपीएल कंपनियों के लिए एक ढांचा तैयार करने और अधिक प्रकटीकरण सहित विभिन्न विकल्पों का पता लगाया जा रहा है।

आरबीआई का मानना ​​है कि अगर किसी एक कंपनी को कुछ करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है तो अन्य संस्थाओं को नवाचार के नाम पर नियमन के बगैर उसी काम की मंजूरी नहीं दी जा सकती है।

सूत्रों ने कहा कि कुछ इकाइयों ने आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करने की मंशा जताई है लेकिन इसके लिए उन्हें समय चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई के साथ इन सभी बिंदुओं पर चर्चा चल रही है और सभी हितधारकों के परामर्श से समाधान निकाला जाएगा।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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