चंडीगढ़, 25 सितंबर (भाषा) पंजाब सरकार ने 15,000 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों को मंज़ूरी दी है। इनमें से धान उत्पादकों ने 12,500 उपकरण खरीद लिए हैं। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी दे रही है, जिसमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर और रोटावेटर शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार गांवों में शिविर लगाकर किसानों से धान की पराली न जलाने का आग्रह कर रही है, क्योंकि इससे पर्यावरण, वायु गुणवत्ता और मृदा स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
खुदियां ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन हेतु 500 करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार की है।
उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में किसानों को 1.48 लाख फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें वितरित की जा चुकी हैं।
खुदियां ने कहा, ‘‘इस साल हमने 15,000 सीआरएम मशीनें मंजूर की हैं और इनमें से 12,500 किसानों ने इन्हें खरीदा है।’’
फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी में सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल और जीरो टिल ड्रिल शामिल हैं।
खुदियां ने बताया कि पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है।
राज्य में वर्ष 2024 में कुल 10,909 पराली जलाने की घटनाएं हुईं, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 36,663 थी।
अक्टूबर और नवंबर में धान की कटाई के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए अक्सर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
चूंकि धान की कटाई के बाद रबी की फसल – गेहूँ – की बुवाई का समय बहुत कम होता है, इसलिए कुछ किसान अगली फसल की बुवाई के लिए पराली को जल्दी से हटाने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं।
राज्य में वर्ष 2022 में 49,922, वर्ष 2021 में 71,304, वर्ष 2020 में 76,590, वर्ष 2019 में 55,210 और वर्ष 2018 में 50,590 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं देखी गईं।
भाषा राजेश राजेश रमण
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