नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) उद्योग मंडल एसोचैम ने मंगलवार को कहा कि बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश से पूंजी व्यय को गति नहीं दी जा सकती है और देश की अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने के लिये निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने उद्योग जगत से सरकार के पूंजीगत व्यय बढ़ाने के फैसले के अनुरूप निवेश में तेजी लाने और केंद्रीय बजट 2023-24 में पेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया था।
एसोचैम के नवनियुक्त अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि उन्हें आने वाले दो-तीन साल में ‘निजी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि’ की उम्मीद है। यह केंद्र के पूंजी व्यय बढ़ाने से जुड़ा है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता कि अर्थव्यवस्था में व्यय काफी हद तक सार्वजनिक खर्च हो। निजी क्षेत्र को इसमें शामिल होने की जरूरत है। आज जो परिवेश बनाया जा रहा है और उसके साथ सरकार जो बुनियादी ढांचे पर खर्च कर रही है, उससे घरेलू और विदेशी दोनों कंपनियों के लिये अवसर उपलब्ध हैं। मुझे लगता है कि आप अगले दो-तीन साल में निजी निवेश में तेजी देखेंगे।’’
स्पाइसजेट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सिंह के अनुसार उन्हें लगता है कि निजी क्षेत्र देश में अवसरों का लाभ उठाने की जरूरत को समझ रहा है।
एसोचैम के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह रिजर्व बैंक के लिए रेपो दर में वृद्धि को अब विराम देने का समय है। वाहन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को यह संकेत की जरूरत है कि ब्याज दरें कम हो रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक ने जिस तरह से ब्याज दर को प्रबंधित किया है, वह शानदार है। हालांकि, हमें लगता है कि इस समय, नीतिगत दर में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का कुछ क्षेत्रों पर कुछ हद तक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला है। इसीलिए, हमारा सुझाव है नीतिगत दर में और वृद्धि से पहले सावधानी से विचार करने की जरूरत है।’’
भारतीय रिजर्व बैंक इस सप्ताह बृहस्पतिवार को मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा।
भाषा रमण अजय
अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.