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Wednesday, 25 March, 2026
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तांबे के अन्वेषण, खनन में निवेश जुटाने के लिए नीतिगत सुधार जरूरीः रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भारत को तांबे के अन्वेषण और खनन में निवेश आकर्षित करने के लिए तत्काल नीतिगत सुधार करने चाहिए ताकि निवेश पर अनुकूल प्रतिफल सुनिश्चित हो सके। एक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है।

‘सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस’ (सीएसईपी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि तांबा ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया के केंद्र में है और यह पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक वाहन, निर्माण एवं उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘भारत की तांबे की बढ़ती जरूरत और वैश्विक मांग को देखते हुए देश को अधिक खोज और खनन करना चाहिए क्योंकि बड़े संसाधन और भंडार अब भी अनछुए हैं। निवेश पर अनुकूल प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए तत्काल नीतिगत सुधार जरूरी हैं।’’

देश अपनी तांबे की जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक आयात से पूरी करता है।

रिपोर्ट कहती है कि तांबे के रणनीतिक महत्व को देखते हुए नीलामी से लेकर वैधानिक मंजूरी एवं खनन शुरू होने तक की समूची खनिज रियायत प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाना चाहिए ताकि देरी और लंबित मामलों से बचा जा सके।

सीएसईपी ने कहा कि मौजूदा खनन नीतिगत ढांचे में देश की भूवैज्ञानिक क्षमता का पूरी तरह दोहन नहीं हो पा रहा है। जटिल नीलामी प्रक्रिया और मंजूरियों में देरी के कारण नए निवेश आकर्षित नहीं हो रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की एकमात्र घरेलू तांबा खनन कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) परिचालन अक्षमताओं का सामना कर रही है जिससे अयस्क और सांद्रण उत्पादन स्थिर बना हुआ है।

देश में तांबे की मांग वर्ष 2030 तक बढ़कर 32.4 लाख टन तक पहुंच जाने का अनुमान है। निर्माण, औद्योगिक और विद्युत क्षेत्र तांबे की खपत में प्रमुख होंगे जबकि ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े क्षेत्र भी तेजी से बढ़ेंगे।

भाषा प्रेम प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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