नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने शुक्रवार को कहा कि देश में महत्वपूर्ण संचार यानी क्रिटिकल कम्युनिकेशन से जुड़ी नीतियां और ढांचा तेजी से विकसित किया जा रहा है ताकि एक मजबूत, सुरक्षित और एकीकृत राष्ट्रीय प्रणाली बनाई जा सके।
महत्वपूर्ण संचार सेवाओं का इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों, सार्वजनिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, रक्षा और रेलवे एवं विमानन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। इन संचार सेवाओं का हर हालत में चालू रहना जरूरी होता है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन ए. के. लाहोटी ने यहां ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘नीतियां, स्पेक्ट्रम और मानक तेजी से तैयार किए जा रहे हैं ताकि देश में महत्वपूर्ण संचार के लिए एक लचीला और सुरक्षित ढांचा विकसित हो सके।’’
उन्होंने बताया कि सरकार ने 2018 में राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी-2018) के तहत सार्वजनिक संरक्षण एवं आपदा राहत (पीपीडीआर) नेटवर्क को सशक्त करने की घोषणा की थी।
ट्राई ने अगली पीढ़ी के पीपीडीआर संचार नेटवर्क के बारे में सरकार को जून, 2018 में सिफारिशें दी थीं। इनमें पूरे देश के लिए एक एकीकृत ब्रॉडबैंड पीपीडीआर नेटवर्क की स्थापना और मेट्रो शहरों, सीमावर्ती जिलों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में हाइब्रिड मॉडल लागू करने का सुझाव दिया गया था।
इस अवसर पर लाहोटी ने कहा कि दूरसंचार विभाग से मिले संदर्भों के आधार पर ट्राई ने रेलवे सुरक्षा के लिए 700 मेगाहर्ट्ज़ बैंड में 10 मेगाहर्ट्ज़ का साझा स्पेक्ट्रम आवंटित करने की सिफारिश की है।
कार्यक्रम में ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम की चेयरपर्सन अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश महाद्वीपीय स्तर पर आपातकालीन संचार क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में भी इसी तरह का ढांचा होना जरूरी है।’’
सुंदरराजन ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क सिर्फ प्रौद्योगिकी पर आधारित नहीं होना चाहिए बल्कि उसे एक सुरक्षित, मजबूत, सहयोगी और भरोसेमंद व्यवस्था में भी ढाला जाना चाहिए।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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