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हैदराबाद, 26 नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को फ्रांसीसी विमानन कंपनी सैफरान के विमान इंजनों के रखरखाव, मरम्मत और देखभाल (एमआरओ) संयंत्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने ऑनलाइन संबोधन में निवेशकों को ‘सह-निर्माता’ बताते हुए अपनी सरकार द्वारा शुरू किए गए विभिन्न सुधारों का भी उल्लेख किया। इनमें हाल ही में लागू किए गए नए श्रम कानून भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हैदराबाद में स्थित यह संयंत्र युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।
उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते नागर विमानन क्षेत्र का जिक्र करते हुए सैफरान से आग्रह किया कि वह देश के भीतर विमान इंजनों, उनके घटकों और प्रणोदन प्रणालियों को बनाने पर भी विचार करे।
इस एमआरओ संयंत्र का परिचालन वर्ष 2026 से शुरू हो जाएगा। इस परियोजना में 1,300 करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया गया है।
सैफरान की सहयोगी कंपनी सैफरान एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज इंडिया (एसएईएसआई) की यह इकाई दुनिया में लीप इंजनों के मरम्मत एवं रखरखाव का सबसे बड़ा केंद्र है।
लीप इंजनों का इस्तेमाल एयरबस ए320 निओ और बोइंग 737 मैक्स जैसे पतले आकार वाले वाणिज्यिक विमानों में किया जाता है। लीप इंजन का निर्माण सीएफएम इंटरनेशनल द्वारा किया जाता है, जो सैफरान एयरक्राफ्ट इंजन और जीई एयरोस्पेस का संयुक्त उपक्रम है।
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागर विमानन बाजारों में से एक है और घरेलू एयरलाइनों ने अब तक 1,500 से अधिक विमानों का ऑर्डर दिया है।
एसएईएसआई के संयंत्र में पूर्ण क्षमता हासिल होने पर हर साल 300 लीप इंजनों की सर्विसिंग की जा सकेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इस संयंत्र के पूरी तरह चालू होने पर 1,000 से अधिक कुशल भारतीय तकनीशियन और इंजीनियर यहां काम करेंगे।
पीएमओ के मुताबिक, भारत में एमआरओ क्षमताओं का विकास विदेशी मुद्रा की निकासी को कम करेगा, उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर सृजित करेगा, आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ाएगा और भारत को वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
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