मुंबई, सात जुलाई (भाषा) वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को प्लास्टिक उद्योग से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और निर्यात बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेष के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ उत्पादों के विनिर्माण पर ध्यान देने का आग्रह किया।
मंत्री ने ऑल इंडिया प्लाईवुड मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) द्वारा आयोजित ‘प्लास्टिक उद्योग के विकास के लिए प्रौद्योगिकी सम्मेलन’ में कहा, “हम निम्न-मानक और गुणवत्ता वाली एवं सस्ती, (घरेलू या आयातित) वस्तुओं के उत्पादन या खपत को रोकने के लिए गुणवत्ता जांच और गुणवत्ता नियंत्रण शुरू कर रहे हैं। ये उत्पाद हमारे उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुंचाने के साथ हमारे देश की प्रतिष्ठा और छवि को हानि पहुंचाते हैं।”
गोयल ने कहा कि सरकार इस उद्योग की क्षमता और समस्याओं को लेकर बहुत संवेदनशील है।
उन्होंने कहा, “हम देख रहे हैं कि प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण या प्लास्टिक के कच्चे माल के पुन: उपयोग को बढ़ावा कैसे दे सकते हैं। हम प्लास्टिक को अधिक प्रभावी और कुशल तरीके से नष्ट होने वाला कैसे बना सकते हैं। पुनर्चक्रण की वैश्विक औसत दर केवल नौ प्रतिशत है और कई विकसित देशों में तो यह सिर्फ चार प्रतिशत ही है। इसमें भारत ने बाजी मार ली है, क्योंकि हमारा 13 फीसदी प्लास्टिक पुनर्चक्रित किया जा रहा है। हम चाहेंगे कि निकट भविष्य में इसमें तेजी से वृद्धि हो।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्लास्टिक उद्योग को नए विचारों, नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाने, अनुसंधान और विकास के लिए संबंधित पक्षों से सहयोग के साथ-साथ उभरते समय एवं इस दुनिया की जरूरतों के साथ खुद को ढालना चाहिए।
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