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Friday, 1 May, 2026
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मांग रहने के बीच आवक घटने से मूंगफली तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में सुधार

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नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) मांग बढ़ने के बीच किसानों द्वारा मंडियों में अपनी आवक घटाने से मंगलवार को घरेलू तेल-तिलहन बाजार में मूंगफली तिलहन और बिनौला तेल के दाम में सुधार देखने को मिला। वहीं आयातित सोयाबीन तेल अपनी लागत से लगभग पांच प्रतिशत नीचे बिकने के कारण बाकी तेल-तिलहनों का दाम भी प्रभावित होने से सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में गिरावट दर्ज हुई। मूंगफली तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में मामूली सुधार का रुख है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मूंगफली के किसान पहले से परेशान हैं क्योंकि हाजिर बाजार में इसके दाम एमएसपी से 22-23 प्रतिशत नीचे हैं। किसान और नीचे भाव पर अपना माल बेचने को राजी नहीं हैं, इस कारण बाजार में आवक घट रही है। आवक घटने के बीच सौदों की कमी होने तथा आज कपास नरमा के दाम में 50 रुपये क्विंटल की वृद्धि के बाद मूंगफली तिलहन के दाम कल के मुकाबले थोड़े सुधार के साथ बंद हुए।

उन्होंने कहा कि यही हाल बिनौला का है। सूरजमुखी एवं पाम-पामोलीन के महंगा होने के कारण बिनौला तेल की मांग बढ़ी है। बिनौला तेल का दाम सूरजमुखी से 10 रुपये किलो और पामोलीन से 5-6 रुपये किलो सस्ता बैठता है। इस कारण खासकर नमकीन बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ी है जिसकी वजह से बिनौला तेल कीमत में भी सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि आयातित सोयाबीन तेल की जो लागत बैठती है, उसके मुकाबले पैसों की तंगी के कारण आयातक इसे लगभग पांच प्रतिशत नीचे दाम पर बेच रहे हैं। इसके असर के कारण सरसों तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

उन्होंने कहा कि इस बार सोयाबीन का जितना उत्पादन हुआ है, सरकार उसका लगभग 12-13 प्रतिशत फसल ही किसानों से एमएसपी पर खरीद पायी है। बाकी फसल के लिए हाजिर बाजार का दाम काफी नीचा मिल रहा है। ऐसी हालत रही तो आगे किसान इसकी खेती से विमुख हो सकते हैं। इस खराब स्थिति के बीच सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम भी गिरावट के साथ बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि महंगा होने की वजह से पाम, पामोलीन बाजार में खप नहीं रहा। इसका दाम सरसों, सोयाबीन से भी अधिक है और लिवाल मुश्किल से मिलते हैं। ऐसी स्थिति में पाम, पामोलीन तेल के दाम में भी गिरावट आई।

कपास नरमा का दाम बढ़ाये जाने के बीच मूंगफली तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को तेल-तिलहन के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी। खाद्य वस्तुओं के कारोबार से सट्टेबाजों को दूर रखने के लिए इसके वायदा कारोबार पर प्रतिबंध को जारी रखने के बारे सख्त रवैया अपनाये रखना होगा। सरकारी खरीद या शुल्क घटाने-बढ़ाने जैसे उपायों के बजाय अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए देशी तेल-तिलहनों का बाजार विकसित करने पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,075-6,175 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 5,500-5,825 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 14,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,165-2,465 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,285-2,385 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,285-2,410 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,950 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,650 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,150-4,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,850-3,950 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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