नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बकाया कर्ज मामले में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) मार्च 2025 तक बढ़कर 9.81 प्रतिशत हो गई। मार्च 2018 में यह 5.47 प्रतिशत थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मार्च 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत वितरित ऋण राशि पर एनपीए की दर 2.19 प्रतिशत है जो मार्च 2018 के अंत में 2.71 प्रतिशत थी।
सीतारमण ने कहा कि पीएमएमवाई के तहत एनपीए की दर एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) की औसत एनपीए दर से अधिक है। उन्होंने एमएसएमई के लिए एनपीए के संबंध में कहा कि मार्च 2025 तक बकाया राशि के मुकाबले यह 3.60 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें प्रचार अभियान, आवेदन पत्र का सरलीकरण, ऋण गारंटी योजना, मुद्रा नोडल अधिकारी का नामांकन, सरकार और बैंकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर लगातार समीक्षा शामिल हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सीतारमण ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, ‘व्यक्तिगत ऋण खंड’ के तहत ‘स्वर्ण आभूषणों पर ऋण’ दिसंबर 2023 की तुलना में दिसंबर 2024 के दौरान 71.3 प्रतिशत बढ़ा।
दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 के दौरान उक्त ऋण में वृद्धि 71,858 करोड़ रुपये थी, जबकि गैर-खाद्य ऋण में कुल वृद्धि 17,67,929 करोड़ रुपये थी।
उन्होंने कहा कि ‘सोना के बदले ऋण’ से वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने और विशेष रूप से ग्रामीण, एमएसएमई और वंचित वर्गों के लिए ऋण तक पहुंच प्रदान करने में सहायता मिली है।
भाषा अविनाश रमण
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