नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) अखिल भारतीय किसान सभा ने बृहस्पतिवार को कहा कि एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा दिए गए सी 2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू न होने के कारण बिहार में धान, गेहूं और मक्का किसानों को वर्ष 2024-25 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
एआईकेएस ने कहा कि कुल मिलाकर, वर्ष 2024-25 में, 20 प्रमुख खरीफ और रबी फसलों की खेती करने वाले किसान लगभग तीन लाख करोड़ रुपये अधिक कमा सकते थे यदि उनकी उपज ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ फॉर्मूले के अनुसार निर्धारित कीमतों पर
खरीदी जाती।
एआईकेएस के महासचिव विजू कृष्णन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘स्वामीनाथन आयोग की लागत का डेढ़ गुना मूल्य निर्धारण की सिफ़ारिश अभी तक लागू नहीं की गई है। वर्ष 2014 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिश लागू की जाएगी और किसानों को ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ – यानी खेती की कुल लागत और 50 प्रतिशत – के फ़ॉर्मूले के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।’’
बिहार में माकपा से संबद्ध किसान संगठन एआईकेएस ने कहा कि ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ मूल्य निर्धारण फ़ॉर्मूले के लागू न होने के कारण धान, गेहूं और मक्का उगाने वाले किसानों को वर्ष 2024-25 सत्र में सामूहिक रूप से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
एआईकेएस ने बयान में कहा, ‘‘नौ साल की अवधि में, उनकी कुल आय का नुकसान 71,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। खरीद में व्यापक अक्षमताओं और सीमित एमएसपी कवरेज को देखते हुए, वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक होने की संभावना है, क्योंकि वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मंडी प्रणाली को बंद कर दिया गया था।’’
एआईकेएस के वित्त सचिव पी कृष्ण प्रसाद ने कहा कि उनका मानना है कि बिहार में नीतीश कुमार सरकार, जिसने वर्ष 2006 में एपीएमसी को समाप्त कर दिया था, ‘गरीब विरोधी’ कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘एसकेएम ने बिहार में नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ अभियान चलाने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि नीतीश कुमार गरीब विरोधी हैं।’’
एआईकेएस, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का हिस्सा है, जिसने कृषि कानूनों के खिलाफ वर्ष 2020-21 में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।
उन्होंने कहा कि बिहार में किसानों के सामने तीन प्रमुख मुद्दे हैं- जिनमें अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों की अनुपलब्धता, मनरेगा की खराब स्थिति और बड़ी संख्या में कृषि श्रमिकों का भूमिहीन मजदूर होना शामिल हैं।
राष्ट्रीय आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए, एआईकेएस ने कहा कि वर्ष 2024-25 के लिए उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 20 प्रमुख खरीफ और रबी फसलों की खेती करने वाले किसान लगभग तीन लाख करोड़ रुपये अधिक कमा सकते थे यदि उनकी उपज स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनुशंसित ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ के फॉर्मूले द्वारा निर्धारित कीमतों पर खरीदी जाती।
इसमें कहा गया, ‘‘पिछले नौ वर्षों (2016-2025) में, इन 20 फसलों को उगाने वाले किसानों को सामूहिक रूप से अनुमानित 24 लाख करोड़ रुपये की आय का नुकसान हुआ है। केवल इसलिए क्योंकि ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ फॉर्मूला लागू नहीं किया गया था, भले ही यह मान लिया गया हो कि संपूर्ण उत्पादन सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा गया था, जो कि अवास्तविक है।’’
एआईकेएस ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), एक सरकारी योजना जो भूमिधारक किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करके वित्तीय सहायता प्रदान करती है, किसानों के साथ ‘‘विश्वासघात’’ है।
इस योजना की घोषणा वर्ष 2019 में की गई थी और इसे वर्ष 2018 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया गया था।
एआईकेएस ने कहा कि अगस्त, 2025 की शुरुआत तक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत किसानों को 3.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। इस कुल राशि में 9.7 करोड़ से अधिक किसानों को 20,500 करोड़ रुपये की 20वीं किस्त (2 अगस्त, 2025), 9.8 करोड़ से अधिक किसानों को 22,000 करोड़ रुपये की 19वीं किस्त (24 फ़रवरी, 2025) और 9.4 करोड़ से अधिक किसानों को 20,000 करोड़ रुपये की 18वीं किस्त (5 अक्टूबर, 2024) शामिल है।
इसमें कहा गया है कि अगर ‘सी 2 योग 50 प्रतिशत’ पर एमएसपी लागू किया गया होता, तो अकेले 20 फसलों की खेती करने वाले किसानों को 19 लाख करोड़ रुपये की कमाई होती, जिससे प्रधानमंत्री को 7.80 लाख करोड़ रुपये देने के बाद भी 11 लाख करोड़ रुपये की राशि बचाई जा सकती थी।’’
भाषा राजेश राजेश अजय
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