नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) विश्व बैंक के भारत में क्षेत्रीय निदेशक ऑगस्टे टानो कूमे ने मंगलवार को हरित वृद्धि को कोष देने और लंबी अवधि के वित्त के लिए बैंकों पर निर्भरता कम करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच एक नए प्रकार की साझेदारी की वकालत की।
उन्होंने कोविड महामारी के दौरान गरीबों के संरक्षण करने के साथ-साथ वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ढांचागत निवेश को बढ़ाने की भारत की रणनीति की सराहना भी की।
‘उभरते बाजारों में वृद्धि के लिये वित्त पोषण’ विषय पर उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के परिचर्चा में भाग लेते हुए कूमे ने कहा कि इस समय अधिक ‘मिश्रित वित्त’ की आवश्यकता है। साथ ही, जहां भी जरूरी हो, बकाया और राहत से निपटने के लिए नियमों को मजबूत करने की भी जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमें जनता की भलाई के लिए निवेश की जरूरत है। उभरते बाजारों के विकास के लिए अगली पीढ़ी के वित्त पोषण में अधिक दीर्घकालिक वित्तीय और सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बीच एक नए प्रकार की साझेदारी की आवश्यकता है, जिससे वैश्विक रूप से जनता की भलाई की जा सके। इसका अर्थ है अधिक मिश्रित वित्त लाना है।”
कूमे ने कहा कि उभरते बाजारों में बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए 10,000 अरब डॉलर का वित्तीय अंतर है। उन्होंने कहा कि उस बचत को दीर्घकालिक निवेश में बदलने के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण से सोचने की जरूरत है।
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