नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिसमूह की पांचवीं बैठक में बिजली वितरण इकाइयों (डिस्कॉम) के ऋण पुनर्गठन की एक नई योजना पर चर्चा की गई।
विद्युत मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘मंत्रिसमूह (जीओएम) ने वितरण इकाइयों की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।’’
चर्चा के मुख्य बिंदुओं में लागत को प्रतिबिंबित करने वाले शुल्क सुनिश्चित करने और सब्सिडी तथा सरकारी विभागों के बकाया का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में राज्य सरकारों और नियामकों की भूमिका शामिल थी।
वितरण इकाइयों के ऋण पुनर्गठन के लिए जीओएम द्वारा प्रस्तावित नई योजना की व्यापक रूपरेखा तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इसके अलावा, बैठक में स्मार्ट मीटरिंग कार्यों में तेजी लाने, बिजली खरीद अनुकूलन और मांग पूर्वानुमान में सुधार के लिए डेटा एनालिटिक्स के उपयोग को बढ़ाने आदि पर भी चर्चा की गई।
अपने संबोधन में, लाल ने कहा कि बिजली क्षेत्र की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने वाले आवश्यक सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और नियामक आयोगों के सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने सभी सरकारी प्रतिष्ठानों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर जल्द से जल्द लगाने पर ज़ोर दिया।
विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि वितरण कंपनियों की वित्तीय लाभप्रदता बहाल करने के लिए सुधारात्मक उपाय करने की आवश्यकता है और साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि ये सुधार इस प्रकार किए जाएं कि परिणामस्वरूप किए गए सुधार, अपरिवर्तनीय हों तथा ऋण जाल की स्थिति फिर से उत्पन्न न होने पाये।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से मंत्री समूह का गठन किया गया है और इसका उद्देश्य आवश्यक सुधार उपायों की पहचान करना है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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