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Tuesday, 20 January, 2026
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सतत विकास के लिए इस्पात कबाड़ के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता: अधिकारी

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जयपुर, 20 जनवरी (भाषा) देश को सतत विकास का समर्थन करने, उत्सर्जन कम करने और भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपने उत्पादन प्रक्रियाओं में इस्पात के कबाड़ के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा।

13वें अंतरराष्ट्रीय सामग्री पुनर्चक्रण सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (आईएमआरसी) को संबोधित करते हुए इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव दया निदान पांडे ने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक है। भारत ने पिछले चार वर्षों में तैयार इस्पात की खपत में 11.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।

उन्होंने कहा, “ भारत इस्पात के कबाड़ की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाए, ताकि सतत इस्पात उद्योग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक औसत 31 प्रतिशत तक पहुंचा जा सके।”

मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) द्वारा आयोजित सम्मेलन में पांडे ने कहा, “यह बदलाव दीर्घकालिक ऊर्जा दक्षता हासिल करने, संसाधन सुरक्षा को समर्थन देने और इस्पात क्षेत्र के समग्र पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने बताया कि भारत का कबाड़ परिवेश अभी परिपक्वता के शुरुआती चरण में है। वैश्विक औसत तक पहुंचने में समय लगेगा।

अधिकारी ने कहा, “जैसे-जैसे भारत वित्त वर्ष 2030-31 तक 30 करोड़ टन और वित्त वर्ष 2046-47 तक 50 करोड़ टन इस्पात क्षमता लक्ष्यों की ओर बढ़ेगा, इस्पात कबाड़ सतत इस्पात उत्पादन में निर्णायक भूमिका निभाएगा।”

पांडे ने कहा कि इस्पात क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग दो प्रतिशत का योगदान करता है और सरकार ने राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के तहत वित्त वर्ष 2030–31 तक 30 करोड़ टन कच्चे इस्पात क्षमता का लक्ष्य रखा है।

भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन वित्त वर्ष 2023–24 में 14.43 करोड़ टन रहा। वर्तमान में कबाड़ का योगदान देश में कच्चे इस्पात उत्पादन का लगभग 21 प्रतिशत है।

मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संजय मेहता ने कहा कि भारत में पुनर्चक्रण अब कोई परिधीय गतिविधि नहीं है, बल्कि संसाधन सुरक्षा, जलवायु प्रतिबद्धताओं और विनिर्माण प्रतिस्पर्धा का केंद्रीय हिस्सा है।

दो दिवसीय सम्मेलन में स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा भंडारण और संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की ओर बदलाव सहित विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

भाषा

बाकोलिया रवि कांत रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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