नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने सोमवार को वित्तीय संकट में फंसी विमानन कंपनी गो फर्स्ट के परिसमापन का आदेश दे दिया।
वित्तीय समस्याओं के कारण एयरलाइन ने मई, 2023 में स्वैच्छिक रूप से दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन किया था। इसकी उड़ानों का संचालन भी लंबे समय से बंद है।
न्यायाधिकरण ने 15 पृष्ठ के आदेश में कहा कि वह कंपनी गो एयरलाइंस (इंडिया) लि. के परिसमापन का आदेश दे रहा है।
एनसीएलटी ने कहा कि योजना में कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) को अपने गठन के बाद और समाधान योजना की पुष्टि से पहले किसी भी समय संबंधित कंपनी के परिसमापन का निर्णय लेने का अधिकार है।
गो एयर का नाम बदलकर गो फर्स्ट किया गया था। इसने 17 साल से अधिक समय तक उड़ान सेवाएं दी। एयरलाइन का परिचालन तीन मई, 2023 से निलंबित है।
दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान कम से कम दो बोलीदाता- स्पाइसजेट प्रमुख अजय सिंह एवं बिजी बी एयरवेज और शारजाह स्थित विमानन इकाई स्काई वन सामने आए थे।
यात्रा पोर्टल ईजमाईट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी बिजी बी एयरवेज में बहुलांश शेयरधारक है।
हालांकि कर्ज समाधान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी जिसके बाद न्यायाधिकरण ने एयरलाइन के परिसमापन का आदेश दे दिया है।
इस बीच, विमानन नियामक डीजीसीए ने गो फर्स्ट के 54 विमानों का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है।
एयरलाइन ने 2005-06 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली उड़ान के साथ घरेलू परिचालन शुरू किया था और इसने 2018-19 में अंतरराष्ट्रीय परिचालन भी शुरू किया।
नकदी समस्या से जूझ रही एयरलाइन ने मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष में 1,800 करोड़ रुपये के नुकसान की सूचना दी।
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रमण प्रेम
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