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Monday, 23 March, 2026
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एनसीएलटी मनमाने ढंग से नहीं दे सकते दिवाला कार्यवाही का आदेशः न्यायालय

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नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ‘मनमाने या मनमौजी ढंग’ से दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आदेश नहीं दे सकते हैं और उन्हें कर्जदार की तरफ से दी गई दलीलों को भी ध्यान रखना होगा।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अगर एक कर्जदार कंपनी इस आधार पर दिवाला प्रक्रिया की शुरुआत का विरोध करती है कि उसके पक्ष में भुगतान का एक फैसला आया हुआ है, तो एनसीएलटी को दिवालिया कानून की धारा सात (पांच)(ए) के तहत कर्जदाता के दावे पर अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल लंबित रखना होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) की यह धारा भले ही न्यायाधिकरण को विवेकाधिकार देती है लेकिन ऐसे अधिकार का इस्तेमाल मनमाने ढंग से या मनमौजी तरीके से नहीं किया जा सकता है। अगर तथ्य और हालात एक खास तरीके से विवेकाधिकार के इस्तेमाल की मांग करते हैं तो वैसा ही किया जाना चाहिए।’’

इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने एनसीएलटी और एनसीएलएटी के उन आदेशों को निरस्त कर दिया जिनमें चूककर्ता कंपनी विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का एक्सिस बैंक ने अनुरोध किया था।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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