नयी दिल्ली, 11 नवंबर (भाषा) अनुभवी बैंकर और सेल्सफोर्स साउथ एशिया की प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य ने मंगलवार को कहा कि कभी-कभी छंटनी बाजार में बदलाव के साथ तालमेल बिठाने वाले व्यवसायों का एक स्वाभाविक हिस्सा होती है।
उन्होंने लोगों से नए कौशल को जोश के साथ अपनाने और सीखने का आग्रह किया, और कहा कि बदलावों से घबराने की जरूरत नहीं।
भट्टाचार्य ने बताया कि उनके पिता ने 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने के बाद आगे कोई काम न करने का फैसला किया, जबकि उन्होंने उस उम्र के बाद नए करियर के रास्ते अपनाए।
उन्होंने एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरे पिता 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हुए। उनके पास कुछ और करने की ऊर्जा पहले ही खत्म हो चुकी थी। उस समय के मुकाबले मैं अब उनसे 12 साल बड़ी हूं, और मैंने अपने लिए एक करियर ढूंढ लिया है।’’
भट्टाचार्य ने 2013 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। वह 2017 में एसबीआई से सेवानिवृत्त हुईं और 2020 में क्लाउड आधारित सेवा प्रदाता सेल्सफोर्स इंडिया की चेयरपर्सन और सीईओ के रूप में एक नए करियर की शुरुआत की।
व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
भट्टाचार्य का मानना है कि भारत के पास एक बढ़त है, क्योंकि यहां के लोग बदलाव को स्वीकार करने और खुद को अनोखे ढंग से फिर से प्रशिक्षित करने के लिए तैयार हैं।
बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण अभियान के बावजूद उद्योग में छंटनी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि छंटनी संगठनात्मक परिवर्तन का एक स्वाभाविक हिस्सा है। कंपनियां पारंपरिक और नए जमाने के बाजार चक्रों के अनुसार खुद को नया रूप देती हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में छंटनी और कुछ में भर्ती का सिलसिला हमेशा चलता रहा है और इसलिए नए कौशल से लैस होकर जोश के साथ वापसी करनी चाहिए।
भाषा पाण्डेय अजय
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