कोलकाता, 20 अगस्त (भाषा) अमेरिका के उच्च शुल्क लगाए जाने से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर काफी असर पड़ेगा, जो भारत के निर्यात में करीब 45 प्रतिशत का योगदान करता है। कपड़ा, हीरा और रसायन क्षेत्र के एमएसएमई पर इसका सबसे गंभीर असर होने की आशंका है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाता है और 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी होगा। इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत होगा जिसका भारत के कई क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा।
इसमें कहा गया कि अमेरिका को भारत के निर्यात में कपड़ा, रत्न व आभूषण की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है और इसके सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है। इन क्षेत्रों में एमएसएमई की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है और इन पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा। एक अन्य क्षेत्र जिसे दबाव का सामना करना पड़ सकता है, वह है रसायन जहां एमएसएमई की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात के सूरत स्थित रत्न एवं आभूषण क्षेत्र, शुल्क का झटका महसूस करेगा। देश के रत्न एवं आभूषण निर्यात में हीरे की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है और अमेरिका इसका एक प्रमुख उपभोक्ता है।
रसायन क्षेत्र में भी भारत को जापान और दक्षिण कोरिया से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों में शुल्क कम है।
इस्पात क्षेत्र में अमेरिकी शुल्क का एमएसएमई पर नगण्य प्रभाव पड़ने का अनुमान है क्योंकि ये इकाइयां मुख्यतः ‘री-रोलिंग’ और लंबे उत्पादों में लगी हुई हैं। अमेरिका मुख्य रूप से भारत से सपाट उत्पादों का आयात करता है।
कपड़ा क्षेत्र में अमेरिका में सिले परिधानों की बिक्री में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में गिरावट आने की उम्मीद है क्योंकि इन देशों में शुल्क कम हैं।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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