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Friday, 27 March, 2026
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यूपीआई बाजार में विदेशी कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी पर सांसदों की संसद में मुद्दा उठाने की योजना

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नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) यूपीआई ऐप के जरिये भुगतान के बढ़ते चलन के बीच नियामकों समेत सांसदों ने बाजार में विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों के एकाधिकार को लेकर चिंता जताई है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2022 तक देश में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) की 60 से अधिक एप्लिकेशन है।

वहीं, वालमार्ट के स्वामित्व वाली फोनपे और गूगलपे का यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा में 81 प्रतिशत से अधिक और मूल्य का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा है। जबकि एनपीसीआई प्रत्येक कंपनी की बाजार हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत तक सीमित करने पर जोर दे रहा है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कुछ सांसदों समेत कई सांसद आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद में और संबंधित संसदीय समिति की बैठकों में यूपीआई से जुड़े इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहे हैं।

सांसदों ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने पर सहमति के बाद कहा कि इस मामले में उनके संबंधित पक्षों द्वारा अभी औपचारिक रुख अपनाया जाना बाकी है।

सांसदों का कहना है कि कंपनियों को जनवरी 2023 तक अपनी बाजार हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत की नियामक सीमा के भीतर कम करने की आवश्यकता है, जबकि कुछ कंपनियां इस समय सीमा बढ़ाने के लिए हाथ-पैर मार रही है।

सांसदों ने कहा कि इस महत्वपूर्ण बाजार में कुछ कंपनियों का हावी होना सही नहीं है और विशेष कर तब जब, इनमे से ज्यादतर विदेशी कंपनियां हो। इससे प्रणालीगत जोखिम पैदा हो सकता हैं।

भाषा जतिन पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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