नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) देशी तेल-तिलहनों की बाजार मांग कमजोर रहने के बीच स्थानीय बाजार में सोमवार को अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट दर्ज हुई तथा सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल कीमतें गिरावट के साथ बंद हुईं। दूसरी ओर, साबुत खाने वालों के साथ-साथ गुजरात में मांग बढ़ने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। सामान्य कामकाज के बीच मूंगफली से सस्ता होने की वजह से गिरावट के आम रुख के बीच बिनौला तेल के भाव स्थिर बने रहे।
शिकॉगो और मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट रही।
सूत्रों ने कहा कि देश में किसानों की ओर से तिलहन का उत्पादन बढ़ाने में सफलता मिली है लेकिन सस्ते आयात के सामने देशी तेल-तिलहनों का बाजार ही नहीं है। इस कारण, किसान जब मंडियों में अपनी उपज लाते हैं तो मंडी वाले उनकी फसलों का हाजिर दाम, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम लगाते हैं। अगली फसल बोने के लिए जरूरतमंद किसानों को पैसों की तुरत फुरत आवश्यकता होती है। ऐसे में जरूरतमंद किसान अपनी उपज सस्ते में बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के एमएसपी पर खरीद करने के आश्वासनों के बावजूद महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब, हरियाणा जैसे उत्पादक राज्यों की मंडियों में किसानों को अपनी कपास फसल के एमएसपी से काफी कम दाम पर मिलने की खबरें हैं। ऐसी ही हालत सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी का भी है जिनके हाजिर दाम मंडियों में एमएसपी से काफी कम लगाये जा रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेल की कमी वाले इस देश में एक तरफ धन की दिक्कतों को झेल रहे आयातकों को, बैंकों का कर्ज लौटाने के लिए लागत से नीचे दाम पर अपने आयातित तेल को बेचना पड़ रहा है दूसरी ओर देशी तेल-तिलहनों का बाजार सस्ते आयातित तेलों के सामने काफी कम रह जाता है। ऐसे में सरकार को देशी तेल-तिलहनों को संरक्षण देते हुए पहले इसका बाजार बनने की ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा। वरना तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाना तथा एमएसपी हर साल बढ़ाने की कवायद निरर्थक साबित होगी।
उन्होंने कहा कि ऊंचे दाम पर मांग प्रभावित रहने से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट आई। सोयाबीन तिलहन के हाजिर दाम एमएसपी से 14-15 प्रतिशत तक नीचे चल रहा है। मूंगफली का हाजिर दाम एमएसपी से लगभग 14 प्रतिशत नीचे है। मलेशिया में निरंतर गिरावट जारी है जबकि एक समय कुछ खाद्य तेल विशेषज्ञ मलेशिया में और तेजी आने की संभावना जता रहे थे। इन विशेषज्ञों के मलेशिया में और तेजी आने के अनुमान पर, जिन व्यापारियों ने तेल आयात के आर्डर जारी कर दिये थे, मलेशिया के निरंतर टूटने से उनकी हालत पतली है। देश में कोई संगठन इस मामले में बाजार की जमीनी सच्चाई सामने नहीं लाते दीखते। सरकार को इन सब स्थितियों को ध्यान में लेकर अपनी नीतियां बनाने की आवश्यकता है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 7,075-7,125 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,375-6,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,000 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,435-2,735 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,625 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,450-2,550 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,450-2,585 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,175 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,450 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,025 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 12,025 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 4,625-4,675 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,325-4,425 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश
राजेश अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.