नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को कारोबार का मिला जुला रुख रहा। एक ओर जहां सोयाबीन इंदौर और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई वहीं कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती देखने को मिली। सरसों-मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं सोयाबीन डीगम तेल जैसे खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।
मलेशिया एक्सचेंज में फिलहाल लगभग एक प्रतिशत की गिरावट है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 1.5 प्रतिशत टूटा था और फिलहाल यहां 0.3 प्रतिशत की गिरावट है।
बाजार सूत्रों ने बताया कि पूरा तेल उद्योग बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है और हालात ऐसे हैं कि कई तेल मिलें बंद हो सकती हैं। सस्ते आयातित तेलों ने देश के तेल मिलों, किसानों और उपभोक्ताओं की कमर तोड़ रखी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि वह तेल तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन सस्ते आयात के आगे यह कैसे संभव है?
उन्होंने कहा कि किसानों के पास पिछले साल के स्टॉक भी नहीं खपे हैं तो किसान उत्पादन बढ़ाकर भी क्या कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि सस्ते आयातित तेलों की उपस्थिति बनी रही तो देश के किसान चाहे जितनी भी उपज बढ़ा लें, वह खपेगा कहां ? या तो किसानों को सस्ता बेचना होगा या फिर वो तिलहन बुवाई के स्थान पर लाभप्रद फसलों की खेती का रुख करने को विवश होंगे।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को देशी तेल तिलहन किसानों, तेल मिलों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन बिठाना होगा और उसी के अनुरूप कोई भी कदम उठाने होंगे।
सरकार ने खाद्यतेलों के शुल्क मुक्त आयात की छूट दी पर उसे इस बात को भी संज्ञान में लेना चाहिये कि इससे तेल कीमतों में मनोवांछित कमी आई भी या नहीं। हकीकत यह है कि शुल्कमुक्त आयातित तेल बाजारों में प्रीमियम के साथ बिक रहा है और उपभोक्ता महंगे में इन्हें खरीद रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर आयातित तेलों के दाम पहले से भी आधे रह गये हैं फिर भी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अधिक रखे जाने की आड़ में उपभोक्ताओं को ये तेल प्रीमियम दाम देकर महंगे में खरीदना पड़ रहा है। यानी शुल्कमुक्त आयात की छूट से भी तेल कीमतें आम जनता को राहत देने में विफल रही हैं।
सूत्रों ने कहा कि खाद्यतेल उद्योग, छोटे संयंत्रों की दुर्दशा यह है कि उन्हें तिलहन मिलने में मुश्किल आ रही है क्योंकि किसान सस्ते में बेचना नहीं चाहते। अगर महंगे में लेकर अपनी मिल चलाया भी जाये तो पेराई की लागत के बाद इन तेलों का सस्ते आयातित तेलों के भाव के आगे टिकना मुश्किल है।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,885-6,935 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,635-6,695 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,480-2,745 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,080-2,210 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,140-2,265 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,675-5,775 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,420-5,440 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
