नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) साख निर्धारक एजेंसी इक्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में कीमतों के दबाव के साथ-साथ नियामकीय उतार-चढ़ाव और लागत मुद्रास्फीति प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के लाभ मार्जिन को प्रभावित करेगी।
इक्रा ने बयान में कहा कि वॉकहार्ट, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स, फाइजर, एबॉट इंडिया, सिप्ला, ल्यूपिन, सन फार्मास्युटिकल्स और डॉ रेड्डीज सहित 16 भारतीय फार्मास्युटिकल फर्मों का राजस्व वित्त वर्ष 2022-23 में मामूली 4-6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। उसने कहा कि यह वृद्धि वित्त वर्ष 2021-22 की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि से कम होगी।
इक्रा ने कहा कि हालांकि, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए, उसे उम्मीद है कि इन 16 कंपनियों के राजस्व में 6-8 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जो मुख्य रूप से घरेलू और उभरते बाजारों के कारण होगी।
इक्रा ने कहा, ‘‘अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में मूल्य को नियंत्रित रखने के दबाव और लागत बढ़ने के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2022-23 में इक्रा परिचालन लाभ मार्जिन में आधा से एक प्रतिशत का संकुचन होने की संभावना है।’’
भाषा राजेश राजेश अजय
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