मुंबई, 12 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को सहकारी और निजी चीनी मिलों के लिए एक प्रोत्साहन योजना की घोषणा की। यह उन्हें वित्तीय क्षमता निर्माण में मदद करेगी और इन मिलों के बीच गुणवत्तापूर्ण प्रदर्शन को प्रोत्साहित करेगी।
योजना का उद्देश्य गुणवत्ता के मोर्चे पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को पुरस्कृत करना है। इसे अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और सहकारी चीनी उद्योग के हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किया गया है।
एक सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य चीनी मिलों की गुणवत्ता में सुधार लाना, प्रतिस्पर्धी गुणवत्ता मानकों वाली मिलों की पहचान करके और उन्हें पुरस्कृत करके वित्तीय क्षमता का निर्माण करना है।
इस योजना के तहत, चीनी मिलों का मूल्यांकन नौ प्रमुख मापदंडों के आधार पर प्रतिवर्ष किया जाएगा, जिसमें शीर्ष प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार दिए जाएंगे।
मूल्यांकन मानदंडों में – पिछले तीन वर्षों में किसानों को समय पर 100 प्रतिशत उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) भुगतान (15 अंक), मिल में अन्य विभागों का प्रदर्शन (10 अंक), उच्चतम चीनी रिकवरी दर (10 अंक), प्रति हेक्टेयर उत्पादन (10 अंक), कृत्रिम मेधा का उपयोग और अधिकतम क्षेत्र कवरेज (10 अंक), कम कार्बन उत्सर्जन और उच्च कार्बन क्रेडिट (10 अंक), सरकारी ऋणों का समय पर पुनर्भुगतान (10 अंक), लागत दक्षता, लेखा परीक्षा और समग्र परिचालन दक्षता (5 अंक), कर्मचारी संख्या सीमा और मजदूरी भुगतान (5 अंक) शामिल हैं।
चयन प्रक्रिया में दो-स्तरीय समिति प्रणाली शामिल है। क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक अपने प्रभागों से छह सर्वश्रेष्ठ मिलों – सहकारी और निजी क्षेत्रों से तीन-तीन – की सूची चीनी आयुक्त की अध्यक्षता वाली एक जांच समिति को प्रस्तुत करेंगे।
समिति छह सहकारी और उतनी ही निजी मिलों को छांटेगी, जिसमें से राज्य के सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता वाला एक अन्य पैनल प्रत्येक श्रेणी में अंतिम तीन विजेताओं का चयन करेगा।
प्रस्ताव में कहा गया है कि पुरस्कारों और अन्य विशिष्टताओं का विवरण बाद में घोषित किया जाएगा।
भाषा राजेश राजेश रमण
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