नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के महानिदेशक आशीष खन्ना ने सोमवार को कहा कि यह संगठन एकीकृत फोटोवोल्टिक प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो इमारतों को सौर ऊर्जा उत्पन्न करने और उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी।
उन्होंने वास्तुकला में ही सौर मेधा को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार से शुरू हुए 17वें गृह शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए खन्ना ने कहा कि शहरी क्षेत्र वैश्विक बिजली का 70 प्रतिशत से अधिक उपभोग करते हैं और दो-तिहाई से अधिक उत्सर्जन करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस प्रवृत्ति के और भी बढ़ने की संभावना है क्योंकि अगले कुछ दशकों में ऊर्जा खपत में वृद्धि में आवासीय बिजली की खपत का हिस्सा सबसे अधिक रहने का अनुमान है।’’
इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का आयोजन ‘गृह काउंसिल’ द्वारा किया गया जो हरित भवन रेटिंग प्रणाली गृह का संचालन करती है।
खन्ना ने बताया कि शहरों में प्रदूषण पहले से ही अगली पीढ़ी के जीवन का दम घोंट रहा है और सतत विकास को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, ‘‘ फिर भी, उनकी छतों, अग्रभागों और रोशनदानों की विशाल क्षमता का दोहन नहीं हो पाया है।’’
बिल्डिंग-इंटिग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (बीआईपीवी) प्रौद्योगिकी की क्षमता के बारे में खन्ना ने कहा कि यह इमारतों की सतह को ऊर्जा, सौंदर्य और कार्यक्षमता को मिलाकर बिजली उत्पादन करने वाली परिसंपत्तियों में बदल सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए जहां भूमि सीमित है और बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है.. बीआईपीवी एक विलासिता नहीं है बल्कि यह एक रणनीतिक आवश्यकता है जो बिना फैलाव के विकास, उत्सर्जन के बिना ऊर्जा तक पहुंच की अनुमति देती है।’’
बीआईपीवी को जलवायु लचीलेपन के लिए अनुकूलित किया जा सकता है जिससे सबसे कठिन परिस्थितियों में भी विश्वसनीय सौर उत्पादन सुनिश्चित होता है।
आईएसए एक बीआईपीवी गाइडबुक भी विकसित कर रहा है। एक ऐसा व्यावहारिक खाका है जिसमें इसके सदस्य देशों के लिए ‘डिजाइन’ के सिद्धांत, प्रमाणन मानक और नीति एकीकरण रणनीतियां शामिल होंगी।
भाषा निहारिका अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
