नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आवाजाही बाधित होने की आशंका के बीच इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी के कुछ हिस्सों के लिए नए सीआईएफ (लागत, बीमा और माल ढुलाई) सौदों से बचने की सलाह दी है।
फेडरेशन ने रविवार को जारी एक परामर्श में निर्यातकों से कहा है कि जहां तक संभव हो वे एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) शर्तों पर काम करें। इस व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय खरीदार माल ढुलाई, बीमा और संबंधित जोखिमों को वहन करता है, जिससे भारतीय निर्यातक निश्चित मूल्य वाले अनुबंधों पर अचानक बढ़ने वाली लागत के जोखिम से बच जाते हैं।
निर्यातकों के निकाय ने चेतावनी दी, ‘ईरान और यूएई के घटनाक्रम ‘बंकर’ (मालवाहक जहाजों में प्रयुक्त ईंधन) की कीमतों को बढ़ा सकते हैं… कम समय के नोटिस पर कंटेनर और बल्क फ्रेट में भारी वृद्धि हो सकती है।’ साथ ही, बीमा प्रीमियम में भी तेज उछाल की आशंका जताई गई है।
भारत के चावल निर्यात के लिए यह संकट काफी बड़ा है, क्योंकि अफ्रीका और पश्चिम एशिया को होने वाला निर्यात कुल राष्ट्रीय चावल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, पश्चिम एशिया को 39 लाख टन और अफ्रीका को 71.6 लाख टन चावल भेजा गया।
भाषा अजय सुमित पाण्डेय
पाण्डेय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
