नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) कंपनी संचालन मामले में निवेशकों को परामर्श देने वाली इनगवर्न ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को लेकर निवेशकों को आगाह किया है। कंपनी के आईपीओ के बीच उसने विवादित कर दावों सहित कुल 4,717 करोड़ रुपये की आकस्मिक देनदारियों पर चिंता जताई है।
इनगवर्न का कहना है कि नकारात्मक परिणाम उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी की भविष्य की कमाई को ‘काफी कम’ कर सकता है।
कंपनी के 11,607 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को अबतक लगभग 13 गुना अधिक अभिदान मिल चुका है। आईपीओ बृहस्पतिवार को बंद हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (एलजीईआई) ने कुल 4,717 करोड़ रुपये की आकस्मिक देनदारियों का खुलासा किया है, जो उसकी कुल संपत्ति (आईपीओ के लिए दाखिल विवरण पुस्तिका से प्राप्त कुल योग) का 73 प्रतिशत है। ये देनदारियां अधिकारियों के विवादित कर दावों से संबंधित हैं। इन मामलों में नकारात्मक परिणाम भविष्य की कमाई को काफी कम कर सकता है या फिर प्रावधान की आवश्यकता हो सकती है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की प्रवर्तक दक्षिण कोरियाई मूल इकाई एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक की आईपीओ के बाद भी महत्वपूर्ण 85 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। इसके परिणामस्वरूप ‘‘स्वामित्व केंद्रित होगा और संभावित अल्पांश शेयरधारकों का प्रभाव सीमित होगा।’’
इनगवर्न के अनुसार, कंपनी का निर्गम पूरी तरह से बिक्री पेशकश है। इसमें पूंजीगत लाभ प्रवर्तक को प्राप्त होगा और कंपनी को विस्तार के लिए कोई नया वित्तपोषण प्राप्त नहीं होगा।
एलजीईआई का आईपीओ पूरी तरह से 10.18 करोड़ शेयरों का बिक्री प्रस्ताव है। यह दक्षिण कोरिया स्थित मूल इकाई की लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है।
प्रॉक्सी कंपनी के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की भारतीय इकाई लाइसेंस समझौते के तहत दक्षिण कोरियाई प्रवर्तक को रॉयल्टी का भुगतान कर रही है। ऐसा नहीं होने पर नियामकीय जांच या कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनी ने कहा, ‘‘विवरण पुस्तिका (आरएचपी) जमा करने की तिथि तक, कंपनी पर प्रवर्तक को रॉयल्टी भुगतान के संबंध में 315 करोड़ रुपये की आकस्मिक देनदारी है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि भविष्य में दक्षिण कोरियाई कर अधिकारी ऐसा कोई मामला नहीं उठाएं, जिनका परिचालन परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों को इन दावों में प्रगति और समाधान पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
बाजार नियामक सेबी के पास जमा विवरण पुस्तिका में शुद्ध बिक्री के 2.3 प्रतिशत (एलसीडी टीवी/मॉनीटर के अलावा अन्य उत्पादों के लिए) और 2.4 प्रतिशत (एलसीडी टीवी और मॉनिटर के लिए) की एक निश्चित रॉयल्टी का खुलासा किया गया है।
राजस्व के अनुपात के रूप में, यह रॉयल्टी वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान 1.63 प्रतिशत और 1.9 प्रतिशत के बीच बैठती है।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘सेबी सूचीबद्धता विनियमों के तहत, प्रवर्तक बिना शेयरधारकों की मंजूरी के घरेलू स्तर पर विनिर्मित उत्पादों के सालाना कुल कारोबार के पांच प्रतिशत तक रॉयल्टी शुल्क बढ़ा सकता है। यह प्रावधान अल्पांश निवेशकों की निगरानी के बिना मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।’’
इसमें यह भी कहा गया है कि भारतीय इकाई लाइसेंस पर निर्भर है। यह अपने प्रवर्तक, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंक. के साथ एलजी ब्रांड, पेटेंट तकनीकों और तकनीकी जानकारी के उपयोग के लिए एक जनवरी, 2023 से प्रभावी एक स्थायी लाइसेंस समझौते के तहत काम कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा इस समझौते को छह महीने के नोटिस के साथ समाप्त करने या बदलने से कंपनी का एलजी ब्रांड के तहत उत्पादों के विनिर्माण और बिक्री का अधिकार समाप्त हो जाएगा, जिससे परिचालन में भारी समस्या आएगी।’’
इनगवर्न ने आईपीओ में प्रवर्तकों द्वारा 15 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के बारे में कहा कि सूचीबद्धता के बाद, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स 85 प्रतिशत शेयरधारिता बनाए रखेगी, जिससे संबंधित पक्ष लेनदेन की मंजूरी सहित बोर्ड (निदेशक मंडल) के निर्णयों पर पर्याप्त नियंत्रण संभव होगा।
हालांकि, इनगवर्न रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का आईपीओ निवेशकों को एक बेहतर वित्तीय वृद्धि और मजबूत वितरण नेटवर्क के साथ अच्छी तरह से स्थापित उपभोक्ता टिकाऊ कारोबार में भाग लेने का अवसर दे रहा है।
भाषा रमण अजय
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