न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 26 नवंबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा है कि 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही, उसने यह भी कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से देश को अमेरिका के 50 प्रतिशत शुल्क के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आईएमएफ ने अपने कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा भारत के लिए वार्षिक आकलन पूरा करने के बाद बयान में कहा, ‘‘भारत की अर्थव्यवस्था लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के बाद, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।’’
आईएमएफ ने कहा कि भविष्य में, एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को व्यापक संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाकर समर्थन दिया जा सकता है। यह उच्च संभावित वृद्धि का रास्ता साफ करेगा।
आईएमएफ ने कहा कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद, अनुकूल घरेलू परिस्थितियों के समर्थन से आर्थिक वृद्धि मजबूत बने रहने की उम्मीद है।
मुद्राकोष ने कहा, ‘‘लंबे समय तक 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क बने रहने को मानते हुए वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 6.2 प्रतिशत पर आ जाएगी।’’
मुद्राकोष के अनुसार, जीएसटी सुधार और उसके परिणामस्वरूप प्रभावी दर में कमी से शुल्क के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है। इसमें रूस से ऊर्जा खरीद पर 25 प्रतिशत का शुल्क शामिल है।
हालांकि, आईएमएफ ने कहा कि आर्थिक दृष्टिकोण के लिए निकट भविष्य में महत्वपूर्ण जोखिम भी हैं। सकारात्मक पक्ष यह है कि नए व्यापार समझौतों के समापन और घरेलू स्तर पर संरचनात्मक सुधारों के तेज कार्यान्वयन से निर्यात, निजी निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
वहीं नकारात्मक पक्ष यह है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक बिखराव के और गहराने से वित्तीय स्थितियां और सख्त हो सकती हैं, कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है और व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और आर्थिक वृद्धि में कमी आ सकती है।
भाषा रमण अजय
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