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Sunday, 22 February, 2026
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वैश्विक प्रौद्योगिकी जगत में भारतीयों का दबदबा ‘सकारात्मक’, चीन एक ‘बड़ी शक्ति’: सिस्को अध्यक्ष

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(विजय जोशी)

नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी सिस्को के अध्यक्ष और मुख्य उत्पाद अधिकारी जीतू पटेल का मानना है कि दुनिया की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों की कमान संभाल रहे भारतीय मूल के अधिकारियों की बढ़ती संख्या को ‘प्रतिभा पलायन’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, यह भारत और विश्व दोनों के लिए ही ‘अत्यंत लाभकारी’ है।

इस बहस पर कि क्या भारत को तब नुकसान होता है जब उसकी सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं अमेरिका और अन्य विकसित देशों में अगुवा बनकर उभरती हैं, पटेल ने इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया।

पटेल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘मैं भारत को प्रतिभा के ‘प्रमुख निर्यातक’ के रूप में देखता हूं। मैंने इसे कभी ‘एक का लाभ-दूसरे की हानि’ वाले समीकरण के रूप में नहीं सोचा है।’

उनका तर्क है कि वैश्विक स्तर पर परचम लहरा रहे भारतीय पेशेवरों की सफलता की जड़ें उन सांस्कृतिक संस्कारों में हैं, जो उन्हें अपने देश में मिलते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जो भारतीय यहां जन्मे और पले-बढ़े, उन्हें उन सांस्कृतिक मूल्यों कठिन परिश्रम, शिक्षा और नैतिकता का भरपूर लाभ मिला है जो हमारे भीतर रचे-बसे हैं। जब हम दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाकर सफल होते हैं, तो उसके पीछे मुख्य रूप से वही मूल्य होते हैं जो हमें शुरुआत में सिखाए गए। यह पूरी दुनिया के लिए तो अच्छा है ही, भारत के लिए भी एक सकारात्मक उपलब्धि है।’’

सिस्को अध्यक्ष ने दोहराया, ‘मैं इसे ‘एक का लाभ-दूसरे की हानि’ के रूप में नहीं देखता।’

पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका की कई अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों में भारतीय मूल के अधिकारी शीर्ष पदों पर काबिज हैं। इससे इस बहस को फिर से बल मिला है कि वैश्विक स्तर पर भारत की यह बढ़ती मौजूदगी एक बड़ा अवसर है या फिर देश के लिए नुकसान।

वर्तमान में, अमेरिका और अन्य देशों में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ सबसे प्रभावशाली पदों पर भारतीय और भारतीय मूल के दिग्गज काबिज हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिभा शक्ति के प्रभाव को दर्शाते हैं। अमेरिका में सत्य नडेला माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख हैं और सुंदर पिचाई गूगल की मूल कंपनी-अल्फाबेट का नेतृत्व कर रहे हैं।

वहीं, अरविंद कृष्णा आईबीएम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हैं और शांतनु नारायण दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक एडोब के सीईओ हैं। इनके अलावा, निकेश अरोड़ा साइबर सुरक्षा फर्म पालो अल्टो नेटवर्क्स के सीईओ के रूप में कार्यरत हैं, जबकि विजय राजी ओपनएआई में ‘एप्लिकेशन्स’ के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) हैं, जहां वे प्रमुख एआई मंचों के इंजीनियरिंग कार्यों का नेतृत्व करते हैं।

कृत्रिम मेधा (एआई) और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में चीन के साथ भारत की प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा पर पटेल ने चीन की क्षमताओं को स्वीकार किया, लेकिन किसी भी सरल तुलना के प्रति सावधान भी किया।

उन्होंने कहा, ‘‘चीन एक बड़ी शक्ति है क्योंकि उन्हें एक अलग शासन व्यवस्था का लाभ मिला है। 1.4 अरब आबादी वाले लोकतंत्र को चलाने और पूरी तरह ‘नियंत्रण आधारित’ प्रणाली को चलाने में बड़ा अंतर होता है।’

पटेल ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चीन ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो प्रगति की है, वह ‘प्रशंसनीय’ है।

साथ ही, उन्होंने भारत के संरचनात्मक लाभ की ओर भी इशारा किया, जिसमें अनुकूल जनसांख्यिकी, विशाल पैमाना और वैश्विक साझेदारियां शामिल हैं।

पटेल ने कहा, ‘‘मैं उन अवसरों के बारे में सोचता हूं जो भारत के सामने हैं विशाल पैमाना, जनसांख्यिकीय लाभ और दुनिया भर के देशों के साथ प्रगाढ़ संबंध बनाने की क्षमता।’’

भारत की भविष्य की राह पर विश्वास जताते हुए पटेल ने कहा, ‘‘मैं भारत के पास मौजूद अवसरों और उसकी क्षमताओं को किसी से कम नहीं मानता। मुझे लगता है कि अभी बहुत सी उपलब्धियां हासिल करना शेष है।’’

उनकी यह टिप्पणी उस व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करती है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं की आवाजाही और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को केवल हार-जीत के तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए। इसके बजाय, इसे एक ऐसे विकसित होते ‘परिवेश’ के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां देश अपनी विशिष्ट क्षमताओं का लाभ उठा सकें।

भाषा सुमित अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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