(बरुण झा)
दावोस, 20 जनवरी (भाषा) वैश्विक स्तर पर आर्थिक परिदृश्य सुस्त रहने के बावजूद भारतीय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अपने देश की अर्थव्यवस्था और अपनी कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर अपने वैश्विक समकक्षों की तुलना में कहीं अधिक आशावादी हैं। मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वार्षिक बैठक के दौरान पीडब्ल्यूसी की वार्षिक सीईओ सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की गई। यह सर्वेक्षण करीब 4,454 प्रतिभागियों के विचारों पर आधारित है जिनमें भारत से भी लगभग 50 सीईओ शामिल हैं।
इस सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सीईओ में जहां केवल आधे से कुछ अधिक ही आर्थिक वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं भारत इस मामले में एक स्पष्ट अपवाद के रूप में उभरा है।
सर्वे में शामिल 77 प्रतिशत भारतीय सीईओ ने घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की संभावना जताई है जबकि 57 प्रतिशत ने निकट अवधि में कंपनी की आय बढ़ने को लेकर उच्च भरोसा जताया। यह अनुपात वैश्विक औसत का लगभग दोगुना है।
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि भारत वैश्विक निवेश मानचित्र पर तेजी से ऊपर आया है। संभावित निवेश गंतव्य के रूप में भारत अब अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है जबकि पिछले वर्ष यह सूची में पांचवें स्थान पर था।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां 46 प्रतिशत वैश्विक सीईओ किसी भी नए निवेश की योजना नहीं बना रहे हैं, वहीं सीमापार निवेश की योजना रखने वालों में 35 प्रतिशत अमेरिका, जबकि 13-13 प्रतिशत भारत, जर्मनी और ब्रिटेन में निवेश करना चाहते हैं।
भारतीय सीईओ की नजर में प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ब्रिटेन हैं।
पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, यूएई के साथ समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता और ब्रिटेन के साथ समग्र आर्थिक एवं व्यापार समझौता जैसे करार इस रुझान को और मजबूत करते हैं।
जोखिम के मोर्चे पर वैश्विक सीईओ ने अगले 12 महीनों में वृहद-आर्थिक अस्थिरता, साइबर जोखिम और मुद्रास्फीति को सबसे बड़ी चुनौतियां बताया। वहीं भारतीय सीईओ के लिए प्रमुख जोखिमों में वृहद-आर्थिक अस्थिरता, साइबर जोखिम, प्रौद्योगिकी व्यवधान और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता शामिल हैं।
सर्वे के मुताबिक, साइबर हमलों की बढ़ती तीव्रता और जटिलता को देखते हुए साइबर सुरक्षा ने मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक एवं भारतीय दोनों ही सीईओ के लिए दूसरा सबसे बड़ा जोखिम स्थान हासिल कर लिया है।
प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा (एआई) के संदर्भ में, 66 प्रतिशत भारतीय सीईओ ने प्रौद्योगिकी और एआई की रफ्तार से कदम मिलाने को लेकर चिंता जताई जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 42 प्रतिशत है।
हालांकि, एआई को व्यावसायिक कार्यों में मध्यम या बड़े स्तर पर अपना चुके भारतीय सीईओ में से 32 प्रतिशत ने कहा कि इससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है।
पीड्ब्ल्यूसी ने कहा कि वैश्विक जोखिमों और लगातार बनी वृहद-आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय सीईओ सतर्क जरूर हैं, लेकिन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप निर्णायक नेतृत्व के जरिये अवसरों को भुनाने को लेकर आश्वस्त भी हैं।
सर्वे रिपोर्ट कहती है कि दस में से करीब छह भारतीय सीईओ नए क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात दस में से चार का है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
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