मुंबई, 25 सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय बैंकों को केवल वृद्धि की योजना नहीं बनानी चाहिए, बल्कि अपना पैमाना बदलना चाहिए और दुनिया के शीर्ष 10 बैंकों में शामिल होने की आकांक्षा रखनी चाहिए।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस इंडिया के सर्वश्रेष्ठ बैंक पुरस्कार समारोह में शाह ने कहा, ‘मैं अपने भारतीय बैंकों से कहना चाहता हूं कि उन्हें न केवल वृद्धि की योजना बनानी चाहिए, बल्कि पैमाने को बदलने का प्रयास करना चाहिए। हमारे बैंकों को शीर्ष 10 में होना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का लक्ष्य रखा है।
शाह ने कहा, ‘संविधान में तीन तरह के समावेश… राजनीतिक, सामाजिक और वित्तीय समावेश… की बात की गई है। और यही भारत के विकास की कहानी का मार्गदर्शन कर रहे हैं।’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देना देश की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी समूह और टोरेंट ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां भी किसी समय एमएसएमई ही थीं। ‘यदि किसी देश की बैंकिंग प्रणाली, विशेषकर भारत जैसे देश की बैंकिंग प्रणाली, एमएसएमई को महत्व नहीं देती है, तो इससे राष्ट्र की विकास गाथा रुक जाती है।’
शाह ने कहा कि यदि इन औद्योगिक समूहों को कोई ऋण नहीं देता तो भारत में इतने औद्योगिक घराने नहीं होते।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में एमएसएमई की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष के 20 प्रतिशत से घटकर 14.1 प्रतिशत रह गई।
विश्लेषकों ने हाल ही में एमएसएमई क्षेत्र में ऋण गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने भारत के निरंतर आर्थिक प्रदर्शन का भी जिक्र किया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए, शाह ने कहा कि भारत एक ‘उज्ज्वल स्थान’ के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया मुश्किलों, सामाजिक ध्रुवीकरण और नेतृत्व में विश्वास की कमी से जूझ रही है, तब भारत स्थिरता, भरोसेमंद नेतृत्व और एक मजबूत अर्थव्यवस्था पेश कर रहा है।
शाह ने कहा कि कई देशों की वृद्धि दर एक से दो प्रतिशत है, जबकि भारत ने लगातार सात से आठ प्रतिशत की वृद्धि बनाए रखी है।
भाषा
योगेश रमण
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