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Thursday, 30 April, 2026
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भारत, अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू

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(तस्वीर के साथ)

वाशिंगटन, 14 फरवरी (भाषा) भारत और अमेरिका ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर पहुंचाने का संकल्प किया है। इसके साथ ही शुल्कों में कमी लाने तथा बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यहां हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की ताकि वृद्धि तथा निष्पक्षता को बढ़ावा मिले, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रोजगार सृजन सुनिश्चित हो।

इसमें कहा गया, ‘‘ इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक साहसिक नया लक्ष्य ‘मिशन 500’ निर्धारित किया, जिसके तहत मकसद 2030 तक कुल द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि महत्वाकांक्षा के इस स्तर के लिए नए, निष्पक्ष-व्यापार शर्तों की आवश्यकता होगी।

इसके लिए दोनों देशों ने 2025 अंत तक पारस्परिक रूप से लाभकारी, बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर बातचीत पूरी करने की योजना की घोषणा की।’’

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष इन वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ प्रतिनिधियों को नामित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि व्यापार संबंध पूरी तरह से ‘कॉम्पैक्ट’ (सैन्य साझेदारी, त्वरित वाणिज्य तथा प्रौद्योगिकी के लिए अवसर उत्पन्न करने) आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करें।

इसमें कहा गया, ‘‘ इस नवोन्मेषी, व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए, अमेरिका तथा भारत माल व सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाएंगे। साथ ही बाजार पहुंच बढ़ाने, शुल्क व गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने तथा आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।’’

आम तौर पर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में दो व्यापारिक साझेदार आपस में व्यापार की जाने वाली अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क को या तो खत्म कर देते हैं या काफी कम कर देते हैं। इसके अलावा, वे सेवाओं में व्यापार को बढ़ावा देने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मानदंडों को भी आसान बनाते हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत तथा अमेरिका ने एक छोटे व्यापार समझौते पर चर्चा की थी। लेकिन बाइडन प्रशासन ने इसे टाल दिया था, क्योंकि वे मुक्त व्यापार समझौते के पक्ष में नहीं थे।

ट्रंप और मोदी ने द्विपक्षीय व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए आपसी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने हेतु शीघ्र उठाए गए कदमों का भी स्वागत किया।

वस्तुओं व सेवाओं में अमेरिका और भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2023 में 190.08 अरब अमेरिकी डॉलर (123.89 अरब डॉलर वस्तु व्यापार और 66.19 अरब डॉलर सेवा व्यापार) था। उस वर्ष, अमेरिका को भारत का माल निर्यात 83.77 अरब डॉलर था, जबकि आयात 40.12 अरब डॉलर था। इसमें अमेरिका का व्यापार घाटा 43.65 अरब डॉलर था।

अमेरिका को देश का सेवा निर्यात 2023 में 36.33 अरब डॉलर था, जबकि आयात कुल 29.86 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा (आयात तथा निर्यात के बीच का अंतर) भारत के पक्ष में 6.47 अरब अमेरिकी डॉलर था।

बयान के अनुसार, इसके अलावा अमेरिका ने भारत द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों की सराहना की है, जिसमें बोरबॉन, मोटरसाइकिल, आईसीटी (सूचना व संचार प्रौद्योगिकी) उत्पादों और धातुओं के क्षेत्र में अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करना, साथ ही अल्फाल्फा घास और बत्तख के मांस जैसे अमेरिकी कृषि उत्पादों तथा चिकित्सकीय उपकरणों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘ भारत ने अमेरिका को भारतीय आमों और अनारों का निर्यात बढ़ाने के लिए अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों की भी सराहना की।’’

दोनों देशों ने भारत को औद्योगिक वस्तुओं के अमेरिकी निर्यात और अमेरिका को श्रम-प्रधान विनिर्मित उत्पादों के भारतीय निर्यात को बढ़ाकर द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग करने का संकल्प किया।

दोनों पक्ष कृषि वस्तुओं के व्यापार को बढ़ाने के लिए भी मिलकर काम करेंगे।

इसमें कहा गया, दोनों नेताओं ने दोनों देशों की कंपनियों के लिए उच्च मूल्य वाले उद्योगों में नई परियोजनाओं में निवेश करने के अवसर बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने भारतीय कंपनियों के करीब 7.35 अरब डॉलर मूल्य के जारी निवेश का स्वागत किया।

मोदी और ट्रंप के बीच यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अमेरिका के सभी व्यापारिक साझेदारों पर जवाबी शुल्क लगाने की नीति की घोषणा किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

मोदी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने घोषणा की कि वह और मोदी एक समझौते पर सहमत हुए हैं, जिससे भारत को अमेरिका से अधिक तेल व गैस आयात करने में सुविधा होगी। इससे भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा कम होगा।

ट्रंप ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में भारत द्वारा कुछ अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए आयात शुल्क को ‘बहुत अनुचित’ और ‘कड़ा’ बताया।

नई शुल्क नीति की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि शुल्क के मामले में भारत ‘सबसे आगे है।’ इससे पहले भी उन्होंने भारत को ‘शुल्क का दुरुपयोग करने वाला’ और ‘ शुल्क का बादशाह’ कहा है।

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले वर्ष करीब 130 अरब डॉलर था। इसमें अमेरिका का व्यापार घाटा करीब 45 अरब डॉलर रहा था।

अमेरिका को 2024 में भारत के मुख्य निर्यात में औषधि निर्माण, जैविक (8.1 अरब डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब डॉलर), कीमती तथा कम-कीमती पत्थर (5.3 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब डॉलर), सोना तथा अन्य कीमती धातु के आभूषण (3.2 अरब डॉलर), सहायक उपकरण सहित सूती तैयार वस्त्र (2.8 अरब डॉलर) और लोहा तथा इस्पात के उत्पाद (2.7 अरब डॉलर) शामिल हैं।

आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला, कोक (3.4 अरब डॉलर), कटे तथा पॉलिश किए हुए हीरे (2.6 अरब डॉलर), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 अरब डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान तथा उसके पुर्जे (1.3 अरब डॉलर) और सोना (1.3 अरब डॉलर) शामिल थे।

भाषा निहारिका रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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