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Thursday, 2 April, 2026
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डब्ल्यूटीओ बैठक में विकास के लिए निवेश सुगम बनाने के समझौते का भारत ने किया विरोध: गोयल

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नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि हाल में कैमरून में संपन्न विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की बैठक में, भारत ने विकास के लिए निवेश सुगम बनाने के समझौते पर चीन के नेतृत्व वाले प्रस्ताव का विरोध करने में अकेले ही कदम उठाया।

उन्होंने कहा कि ‘सही बात के लिए अकेले खड़े रहना, दिखावे के लिए भीड़ में शामिल होने से बेहतर है।’

विकास के लिए निवेश सुगम बनाने (आईएफडी) के समझौते का प्रस्ताव सबसे पहले 2017 में चीन और अन्य देशों ने रखा था। यह चीनी निवेश पर अत्यधिक निर्भर है। सरकारी संपत्ति कोष वाले देश भी इस समझौते के पक्षकार हैं।

कैमरून के याउंडे में आयोजित 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में, भारत को छोड़कर, सभी देशों ने इस समझौते का समर्थन किया। यह समझौता वैश्विक मानदंड प्रदान करता है ताकि समझौते के पक्षकार देशों के निवेश और व्यापार के माहौल को बेहतर बनाने और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में निवेशकों के लिए निवेश करना, दैनिक कारोबार और अपने संचालन का विस्तार करना आसान बनाने के प्रयासों का समर्थन किया जा सके।

भारत इस विवादास्पद मुद्दे के खिलाफ अकेले खड़ा रहेगा और डब्ल्यूटीओ रूपरेखा में अनुबंध चार समझौते के रूप में शामिल करने पर सहमति नहीं है।

विश्व व्यापार संगठन समझौते के अनुबंध चार में कुछ सदस्यों वाले व्यापार समझौते शामिल हैं जो अनिवार्य बहुपक्षीय समझौतों के विपरीत, केवल उन डब्ल्यूटीओ सदस्यों पर बाध्यकारी हैं जिन्होंने उन्हें स्वीकार किया है।

गोयल ने यहां संवाददाताओें से कहा, ‘‘कभी-कभी जीवन में अकेले चलना पड़ता है और इसीलिए मैंने डब्ल्यूटीओ में विकास के लिए निवेश सुविधा पर अपनी बातचीत महात्मा गांधी के दर्शन से शुरू की। उनका कहना है कि जब आप सही के लिए खड़े होते हैं, तो भीड़ में खड़े होकर अच्छा दिखने से बेहतर है अकेले खड़े रहना।’’

उन्होंने कहा कि भारत के हितों और डब्ल्यूटीओ के बहुपक्षीय स्वरूप और सर्वसम्मति निर्माण के दृष्टिकोण की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।

गोयल ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हम उन मुद्दों को डब्ल्यूटीओ समझौते में शामिल न होने दें जो डब्ल्यूटीओ को मिली जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए भारत अपने सिद्धांतों और जो सही है उस पर कायम रहा। लेकिन इसके कारण, अन्य देशों के समूह या किसी अन्य देश के साथ हमारे बहुआयामी संबंधों में कोई बदलाव नहीं आया है।’’

मंत्री ने कहा कि उन्होंने अन्य देशों को भारत की स्थिति और रुख के बारे में विस्तार से बताया और ‘‘कुल मिलाकर लोगों ने इसकी सराहना की है।’’

गोयल ने यह भी कहा कि डब्ल्यूटीओ के लाभ को प्राप्त करने के लिए निवेश को व्यापार से जोड़ना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ सदस्यों वाली प्रणाली में उचित सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए या सभी पक्षों की सहमति के बाद हमें निवेश सुविधा या प्रोत्साहन को बहुपक्षीय रूप देना चाहिए।’’

कैमरून में मंत्रिस्तरीय बैठक 30 मार्च को समाप्त हुई।

गोयल ने कहा कि याउंडे पैकेज को जिनेवा में महासभा की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा, जहां ‘हम डब्ल्यूटीओ सुधार घोषणा और कार्य योजना, ई-कॉमर्स पर रोक और कार्य योजना, ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित व्यापार पहलुओं पर समझौता) पर रोक, उल्लंघन न करने और अल्प विकसित देशों के पैकेज पर मंत्रिस्तरीय निर्णय को अंतिम रूप देंगे।’’

उन्होंने कहा कि भारत का मानना ​​है कि कंपनियों को अधिक निश्चितता प्रदान करने के लिए डब्ल्यूटीओ सदस्यों को इस बार ई-कॉमर्स पर रोक की अवधि को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

गोयल ने कहा, ‘‘इस पर अभी भी विभिन्न देशों के बीच चर्चा चल रही है और अगले एक-दो महीनों में जिनेवा में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘भारत का रुख यह था कि हमें थोड़ी लंबी अवधि पर विचार करना चाहिए, ताकि कंपनियां अपनी वाणिज्यिक गतिविधियों की योजना लंबी अवधि के लिए बना सकें।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे और ई-कॉमर्स की परिभाषा पर डब्ल्यूटीओ की चर्चाओं की धीमी गति से निराश हैं, मंत्री ने कहा कि भारत के पास एक मजबूत स्थायी शांति उपबंध है और निराश होने का कोई कारण नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सार्वजनिक भंडारण या ई-कॉमर्स पर रोक लगाने के अंतिम समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं…।’’

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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