नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) सॉफ्टवेयर बनाने वाली जर्मनी की कंपनी एसएपी ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर कंपनी के लिए के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। सॉवरेन क्लाउड की शुरुआत के साथ बेंगलुरु में एक नया नवाचार केंद्र कंपनी द्वारा देश में किए जा रहे महत्वपूर्ण निवेश को बताता है। एसएपी के भारतीय उपमहाद्वीप मामलों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनीष प्रसाद ने यह कहा।
वैश्विक अनिश्चितताएं और कंपनियों में एआई (कृत्रिम मेधा) के बढ़ते उपयोग से भारत में एंटरप्राइज एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर कंपनी की रणनीति में हो रहे बदलाव के बारे में पूछे जाने पर प्रसाद ने कहा कि व्यापक बदलाव अब आम बात हो गए हैं और एसएपी के दृष्टिकोण में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि एसएपी हमेशा से ही व्यवसाय-महत्वपूर्ण एप्लिकेशन और मंच बनाने पर केंद्रित रहा है जो मजबूत एवं टिकाऊ हों।
प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि एसएपी इंडिया वैश्विक स्तर पर एसएपी के लिए सबसे तेज बाजार इकाइयों में से एक बनी हुई है। यह विशुद्ध नवाचार एवं उस गति को उत्पन्न करने की समग्र भावना है जिसकी हमारी अर्थव्यवस्था एवं हमारी प्रतिभा को जरूरत है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि इनमें से कोई भी (वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियां) व्यावसायिक दृष्टिकोण से किसी चीज पर कोई खास असर डाल पाएंगी।’’
जर्मनी की सॉफ्टवेयर विनिर्माता कंपनी भारत को लेकर ‘‘ बेहद आशावादी’’ बनी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम बड़े निवेश कर रहे हैं…हमने बेंगलुरु में अपना नया नवाचार केंद्र शुरू किया है जो हमारा दूसरा केंद्र है…हमने सॉवरेन क्लाउड की घोषणा की है।’’
प्रसाद ने बताया कि भारत में प्रौद्योगिकी परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। सेमीकंडक्टर एवं विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी से भारत, सेवाओं एवं प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी निर्माण में एक महत्वपूर्ण इकाई बन गया है।
गौरतलब है कि कंपनी ने पिछले महीने भारत में अपने एसएपी सॉवरेन क्लाउड को पेश करने की घोषणा की, जिसके बारे में उसने कहा था कि इसे भारत की राष्ट्रीय सूचना सुरक्षा नीति और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए तैयार किया गया है।
एसएपी लैब्स इंडिया ने अगस्त में देवनहल्ली में 41 एकड़ के अपने नए परिसर की शुरुआत की, जो बेंगलुरु में इसका दूसरा एवं विश्व स्तर पर सबसे बड़े परिसरों में से एक है। इसमें विभिन्न चरणों में 19.4 लाख यूरो का कुल निवेश किया गया है।
भाषा निहारिका रमण
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