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Monday, 23 March, 2026
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भारत को शुल्क को आसियान स्तर तक लाने की जरूरत: ईएसी-पीएम सदस्य राकेश मोहन

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(बिजय कुमार सिंह)

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य राकेश मोहन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के लिए आयात शुल्क कम करने की गुंजाइश है और इसे आसियान के स्तर पर लाने के प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का प्रभाव धूमिल पड़ने के साथ ही विश्व व्यापार प्रणाली का संचालन बड़े क्षेत्रीय व्यापार समूहों जैसे यूरोपीय संघ, उत्तरी अमेरिका में अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता (यूएसएमसीए), एशिया में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) और एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में व्यापक एवं प्रगतिशील पार-प्रशांत साझेदार समझौता (सीपीटीपीपी) द्वारा किया जा रहा है।

मोहन ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘ मेरा मानना ​​है कि हमारे शुल्क में काफी कमी लाने और उन्हें कम से कम आसियान के स्तर तक लाने की गुंजाइश है। यह हमारे लिए बेहद अच्छा होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अब, इसका एक निहितार्थ यह है कि इन शुल्क में कमी की भरपाई के लिए विनिमय दर में बदलाव करना होगा।’’

मोहन ने कहा, ‘‘ वैश्विक व्यापार से बाहर न होने के लिए भारत को इन बड़े उभरते व्यापार समूहों का सदस्य बनना होगा। अपनी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल होने पर पुनर्विचार करना चाहिए, साथ ही अपने हितों की उचित सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और सीपीटीपीपी में शामिल होने के लिए भी आवेदन करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि 1990 के दशक के आरंभ से लेकर, जब भारत में आर्थिक सुधार शुरू हुए, 2012 तक भारत समग्र आधार पर अपने शुल्क में लगातार कमी करता रहा तथा कुछ हद तक धीरे-धीरे पूर्व-घोषणा भी करता रहा।

मोहन ने कहा, ‘‘ वर्ष 2012 के बाद यह प्रक्रिया रुक गई और फिर 2017 के बाद से इसमें औसतन कुछ वृद्धि हुई।’’

आसियान देशों में सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, म्यांमा, फिलिपीन और वियतनाम शामिल हैं।

भारत 2013 में वार्ता में शामिल होने के बाद 2019 में आरसीईपी से बाहर हो गया। आरसीईपी में आसियान समूह के 10 सदस्य और उनके छह मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) साझेदार चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।

भारत को अपने यहां चीनी निवेश पर लगे प्रतिबंध हटाने के सवाल पर मोहन ने कहा कि भारत को श्रम-प्रधान उद्योगों की पूरी श्रृंखला में चीनी निवेश का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि चीन में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं कहूंगा कि भारतीय उद्यमियों को चीनी निवेशकों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि इनमें से कई उद्योग यहां आएं।’’

मोहन ने कहा कि लोग हमेशा चीन के बड़े निर्यात की बात करते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि चीन दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है जिसका मूल्य 2400 अरब अमेरिकी डॉलर से भी अधिक है।

उन्होंने कहा कि इस व्यापार में भारत की उपस्थिति बहुत कम है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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