(लक्ष्मी देवी)
इंदौर, 13 फरवरी (भाषा) भारत ने सोमवार को भरोसा जताया कि जी-20 बैठक, कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी जैसे समाधान लाएगी, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश तथा फल और सब्जी के सबसे बड़े उत्पादक देश, भारत ने यह भी कहा कि वह वैश्विक खाद्य सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए दुनिया को खिलाने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि हर देश को टिकाऊ कृषि पद्धतियों की दिशा में काम करना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 30 देशों के लगभग 90 प्रतिनिधियों ने तीन दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर कृषि सचिव मनोज आहूजा भी मौजूद थे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को यहां कहा कि जी-20 बैठक में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी जैसे समाधान सामने आएंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यहां भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 कृषि प्रतिनिधियों की पहली बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कुछ कृषि सुधारों में अग्रणी रहे शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘‘समय की मांग, तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की है – उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना।
उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘बढ़ती आबादी के कारण दुनिया के सामने खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चिंता है। वर्ष 2030 तक वैश्विक खाद्यान्न की मांग वर्ष 2000 के 19.2 करोड़ टन की तुलना में 34.5 करोड़ टन होने का अनुमान है।’’
विश्व की कृषि योग्य भूमि का केवल 12 प्रतिशत भाग ही खेती के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि न तो जमीन बढ़ेगी और न ही प्राकृतिक संसाधन।
इसलिए भविष्य की खाद्य मांग को पूरा करने के लिए भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर तरीके से उपयोग करना और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि जी-20 शिखर सम्मेलन स्थानीय संगठनों के माध्यम से नई प्रौद्योगिकी को जोड़कर कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।’’
उन्होंने कहा कि कृषि को लाभदायक बनाने की आवश्यकता है। चौहान ने कहा कि बाकी चीजों का कोई न कोई एक विकल्प है लेकिन भोजन का नहीं। ‘‘भोजन के लिए, हमें खेती की जरुरत है।’’
मीडिया से अलग से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बढ़ती जनसंख्या के कारण पूरी दुनिया के सामने खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को खिलाने में अपनी सही भूमिका निभाएगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जिसमें संबद्ध कृषि क्षेत्र के अलावा मोटे अनाज और इसके मूल्य वर्धित खाद्य उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
तीन दिन के आयोजन के दौरान, जलवायु-स्मार्ट पहल, छोटे किसानों द्वारा जलवायु-स्मार्ट तकनीक को अपनाने के साथ-साथ कृषि बाजार सूचना प्रणाली, गेहूं की पहल, कृषि जोखिम प्रबंधन और खाद्य हानि में कमी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
भाषा राजेश राजेश रमण
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