नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। इससे पहले इसके 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।
पहली तिमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ यह अनुमान बढ़ाया गया है, जो अमेरिकी शुल्क के प्रभाव को सीमित करेगा।
हालांकि, मुद्राकोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में 2026-27 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 0.2 प्रतिशत घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘जुलाई के विश्व आर्थिक परिदृश्य की अद्यतन रिपोर्ट की तुलना में, 2025 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाया गया है। इसमें पहली तिमाही की मजबूत वृद्धि जुलाई से भारत से आयात पर अमेरिकी शुल्क दर में वृद्धि की भरपाई से कहीं अधिक है। इसके साथ 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है।’’
उल्लेखनीय है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून में 7.8 प्रतिशत रही, जो पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है।
इस महीने की शुरुआत में विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही यह कहा था कि देश सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
आईएमएफ ने जुलाई में भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को संशोधित कर 2025 और 2026 दोनों के लिए 6.4 प्रतिशत कर दिया था। वहीं अप्रैल, 2025 के विश्व आर्थिक परिदृश्य में, देश की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के लिए 6.2 प्रतिशत और 2026 के लिए 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
मुद्राकोष ने कहा कि वैश्विक वृद्धि दर 2024 में 3.3 प्रतिशत से घटकर 2025 में 3.2 प्रतिशत और 2026 में 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
यह जुलाई के विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में जताये गये अनुमान से अधिक है। लेकिन कुल मिलाकर अक्टूबर, 2024 के विश्व आर्थिक परिदृश्य में नीतिगत बदलावों से पहले किए गए अनुमान से 0.2 प्रतिशत कम है।
मुद्राकोष ने कहा कि उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वृद्धि दर 2024 में 4.3 प्रतिशत से घटकर 2025 में 4.2 प्रतिशत और 2026 में चार प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भाषा रमण अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
