नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के निकाय ‘एएचपीआई’ ने उत्तर भारत में अपने सदस्य अस्पतालों को एक सितंबर से बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के पॉलिसीधारकों को नकदी-रहित इलाज की सुविधा बंद करने की सलाह दी है।
बजाज आलियांज ने इस कदम पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि वह हमेशा ग्राहकों को सर्वोत्तम अनुभव दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और मामले का हल निकालने के लिए एएचपीआई के साथ काम कर रही है।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स-इंडिया (एएचपीआई) ने आरोप लगाया कि बजाज आलियांज ने कई वर्षों पुराने अनुबंधों के आधार पर अस्पतालों को भुगतान दरें तय कर रखी हैं और बढ़ती चिकित्सा लागत के अनुरूप संशोधन करने से इनकार कर रही है।
देशभर के 15,200 अस्पतालों का प्रतिनिधित्व करने वाले एएचपीआई ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा कंपनी के खिलाफ मनमाने ढंग से कटौती करने, भुगतान में देरी और पूर्व-अनुमति देने में लंबा समय लगने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
एएचपीआई के महानिदेशक गिरधर ग्यानी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में इनपुट लागत बढ़ने से हर साल सात-आठ प्रतिशत महंगाई रहती है लिहाजा पुराने शुल्क ढांचे पर काम करना असंभव है। उन्होंने कहा कि दरों में बढ़ोतरी न होने से मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
एएचपीआई के इस कदम पर बजाज आलियांज के सामान्य बीमा प्रमुख (स्वास्थ्य बीमा) भास्कर नेरुरकर ने कहा, ‘‘हमें पूरा विश्वास है कि हम एएचपीआई और उसके सदस्य अस्पतालों के साथ मिलकर सौहार्दपूर्ण ढंग से काम करेंगे और ऐसे समाधान पर पहुंचेंगे जो हमारे ग्राहकों के सर्वोत्तम हित में होगा।’’
एएचपीआई ने 22 अगस्त को केयर हेल्थ इंश्योरेंस को भी इसी तरह का नोटिस भेजकर 31 अगस्त तक जवाब मांगा है। जवाब न मिलने पर उसके पॉलिसीधारकों के लिए भी नकदी-रहित इलाज की सुविधा रोक दी जाएगी।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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