नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) एचडीएफसी बैंक ने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र में उठाए गए मुद्दों की स्वतंत्र जांच के लिए बाहरी विधि कंपनियों को नियुक्त किया है।
बैंक ने कहा कि यह कदम तथ्यों पर आधारित एवं निष्पक्ष आकलन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि बाहरी विधि कंपनियों की नियुक्ति एक सक्रिय कदम है, ताकि पत्र में उठाए गए सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की जा सके और वस्तुनिष्ठ एवं तथ्य आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि यह कदम बैंक द्वारा दशकों से अपनाए जा रहे उच्चतम कॉरपोरेट कामकाज मानकों के अनुरूप लगातार समीक्षा एवं तुलना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
उल्लेखनीय है कि देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उनका इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हुआ।
यह पहली बार है जब बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दिया है जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो गए।
चक्रवर्ती ने 17 मार्च को लिखे अपने इस्तीफे में कहा था, ‘‘ पिछले दो वर्ष में बैंक के भीतर मैंने कुछ ऐसी घटनाएं एवं कार्य प्रणालियां देखीं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों व नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। इसी आधार पर मैंने यह निर्णय लिया है।’’
शासन, नामांकन, पारिश्रमिक समिति के चेयरमैन एच. के. भनवाला को लिखे पत्र में चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘ उपरोक्त के अलावा मेरे इस्तीफे का कोई अन्य महत्वपूर्ण कारण नहीं है।’’
चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में सेवानिवृत्ति के करीब एक वर्ष बाद पांच मई 2021 से अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
उनका कार्यकाल 2024 में तीन और वर्ष के लिए बढ़ाकर चार मई 2027 तक कर दिया गया था। चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और अप्रैल 2020 में आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए।
इससे पहले वह निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव थे। ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।
चक्रवर्ती बैंक की मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ ‘रिवर्स मर्जर’ प्रक्रिया के दौरान चेयरमैन बने थे, जो देश की प्रमुख आवासीय वित्त कंपनी है।
एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय एक जुलाई, 2023 से प्रभावी हुआ जिससे 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त बही-खाते वाली एक विशाल वित्तीय इकाई का निर्माण हुआ।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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