मुंबई, 17 नवंबर (भाषा) आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने सोमवार को कहा कि निवेशकों के लिए अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करने के लिए वित्तीय क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं की देखरेख करने वाले नियामकों के बीच नियमों में सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है।
ठाकुर ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि प्रक्रियाओं को सरल बनाने, एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) के लिए प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने, प्रवासी भारतीयों के लिए केवाईसी (अपने ग्राहक को जानों) को सुव्यवस्थित करने और निवेशकों के लिए अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करने को नियामकों के बीच नियमों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए और कदम उठाए जाने की जरूरत है।’’
ठाकुर ने कहा कि सरकार पहले से ही इस पर काम कर रही है।
उन्होंने गिफ्ट सिटी सुधारों के संदर्भ में यह भी कहा कि विदेशी निवेशक भारत के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र को देश के बाकी हिस्सों में अपनी गतिविधियों के लिए एक ‘सैंडबॉक्स’ के रूप में देखते हैं।
आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की सचिव ने उद्योग मंडल सीआईआई के वित्त पोषण शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘गिफ्ट सिटी के प्रति हमारा दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय बाजार गतिविधियों के साथ निरंतर तालमेल बनाए रखने का प्रयास करना है।’’
ठाकुर ने यह भी बताया कि जल्द ही एक नया मध्यस्थता केंद्र भी स्थापित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों से इस पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।
सचिव ने कहा, ‘‘भारतीय वित्तीय क्षेत्र सभी उभरते बाजारों में सबसे स्थिर है, लेकिन हमें इस बात से अवगत होना चाहिए कि वित्तीय परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है।’’
उन्होंने कहा कि आठ प्रतिशत से अधिक की निरंतर वृद्धि के लिए देश को और अधिक निवेश की आवश्यकता है और बैंक तथा पूंजी बाजार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भाषा रमण अजय
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