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Friday, 10 April, 2026
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सरकार ने गहरे भूमिगत क्षेत्र में महत्वपूर्ण खनिजों के खनन नियमों को उदार बनाया

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नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) सरकार ने सोमवार को खनन रियायत नियमों में संशोधनों को अधिसूचित कर दिया जिससे लाइसेंस-प्राप्त कंपनियों को निर्दिष्ट क्षेत्रों के पास खनिजों का पता लगाने और खनन की अनुमति मिल गई है।

इस कदम से गहरे क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाने और उसके उपयोग में मदद मिलने की उम्मीद है।

संशोधन से खनन पट्टों और मिश्रित लाइसेंस वाले क्षेत्रों के आसपास के इलाकों को शामिल करना संभव हो सकेगा। साथ ही प्रमुख और सूक्ष्म खनिजों के पट्टों में संबद्ध खनिजों को भी जोड़ा जा सकेगा।

खान मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि निकटवर्ती क्षेत्रों को शामिल करने की अनुमति से गहरे भूमिगत क्षेत्रों में छिपे खनिजों का पता लगाने और अनुकूलतम खनन को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग पट्टे या लाइसेंस के तहत खनिजों का निकालना संभवत: आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होता।

संशोधित नियमों के तहत गहराई में स्थित भंडारों में छिपे खनिजों के खनन पट्टे या मिश्रित लाइसेंस धारकों के लिए निकटवर्ती भूमि को एक बार में जोड़ने के लिए आवेदन करने की एक सरल और समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

जोड़ा गया क्षेत्र मौजूदा पट्टा क्षेत्र के 10 प्रतिशत या लाइसेंस क्षेत्र के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। नीलाम किए गए पट्टों के लिए, पट्टेदार को अतिरिक्त भूमि से प्राप्त खनिजों पर नीलामी प्रीमियम का 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि गैर-नीलामी वाले पट्टा धारकों को ऐसे उत्पादन पर रॉयल्टी के बराबर राशि का भुगतान करना होगा।

बयान के मुताबिक, संशोधन के जरिये किए गए सुधार खनन क्षेत्र को उद्योगों के लिए खनिजों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देते हैं।

संशोधनों में खनन पट्टे में सूक्ष्म खनिज समेत किसी भी अन्य खनिज को शामिल करने का प्रावधान है और राज्यों को आवेदन के 30 दिनों के भीतर इसकी अनुमति देना अनिवार्य है।

भाषा

रमण प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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