पणजी, 14 सितंबर (भाषा) गोवा खनिज अयस्क निर्यातक संघ (जीएमओईए) ने रविवार को निचले-ग्रेड के लौह अयस्क पर निर्यात शुल्क के संभावित विस्तार की अटकलों पर चिंता व्यक्त की है।
केंद्र सरकार को दिए एक ज्ञापन में जीएमओईए ने इस तरह के किसी भी कदम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया और दावा किया कि इससे गोवा में खनन कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जहां लौह अयस्क मुख्यतः निचले-ग्रेड का होता है।
क्षेत्र की विशिष्ट खनिज विशेषता और ऐसे अयस्क की घरेलू मांग में कमी को देखते हुए जीएमओईए ने दावा किया कि निर्यात शुल्क लगाने से न केवल आजीविका और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियां खतरे में पड़ जाएंगी, बल्कि एक मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन का भंडारण और अपव्यय भी होगा।
गोवा के खनन क्षेत्र में 60 से अधिक साल से प्रमुख हितधारकों का प्रतिनिधित्व करने वाले जीएमओईए का यह ज्ञापन हाल ही में मीडिया में आई उन खबरों के जवाब में आया है जिनमें निम्न-श्रेणी के लौह अयस्कों (58 प्रतिशत लौह अयस्क से कम) पर निर्यात शुल्क के संभावित विस्तार का सुझाव दिया गया है।
ये खबरें 26 अगस्त को आयोजित उच्चस्तरीय हितधारकों की बैठक में हुए विचार-विमर्श पर आधारित थीं, जिसका उद्देश्य भारत में लौह अयस्क और इस्पात उत्पादन बढ़ाने के लिए सुधारों को लागू करना था।
हालांकि, बैठक का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करना और इस्पात क्षेत्र को समर्थन देना था। इसके बावजूद जीएमओईए का मानना है कि विशिष्ट खनिज वाले क्षेत्रों के लिए अनपेक्षित परिणामों से बचने की आवश्यकता है।
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