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Sunday, 8 March, 2026
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गलगोटिया विश्वविद्यालय को ‘रोबोटिक डॉग’ विवाद के बाद एआई समिट से होना पड़ा बाहर

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(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) निजी क्षेत्र के गलगोटिया विश्वविद्यालय को एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शित एक चीन-निर्मित रोबोटिक डॉग को अपना नवाचारी उत्पाद कहकर पेश किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बीच बुधवार को अपना स्टॉल खाली करने के लिए कह दिया गया।

ग्रेटर नोएडा स्थित विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में इस रोबोटिक डॉग को अपने स्तर पर विकसित उत्पाद बताया था, जबकि वह असल में चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का उत्पाद निकला।

विवाद बढ़ने पर सम्मेलन के आयोजकों ने बुधवार को गलगोटिया विश्वविद्यालय के स्टॉल की बिजली आपूर्ति बंद कर दी और उसे आयोजन स्थल खाली करने को कह दिया।

इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई भी प्रदर्शक ऐसी वस्तु दिखाए जो उसकी खुद की बनाई न हो।

कृष्णन ने कहा, “हम इस तरह के उत्पादों का प्रदर्शन जारी नहीं रखना चाहते।”

बाद में विश्वविद्यालय ने एक माफीनामा जारी करते हुए कहा कि पवेलियन संभाल रही प्रतिनिधि उत्पाद के ‘तकनीकी मूल के बारे में पूरी तरह अवगत नहीं थीं’ और कैमरे के सामने जोश में आकर तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे बैठीं। इसके अलावा वह मीडिया से बात करने के लिए भी अधिकृत नहीं थीं।

संस्थान ने कहा, ‘‘इस नवाचार को लेकर किसी तरह की संस्थागत मंशा से गलत प्रस्तुति नहीं की गई और विश्वविद्यालय शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदार प्रस्तुति के लिए प्रतिबद्ध है।’’

राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान मंगलवार को विश्वविद्यालय के पवेलियन में ‘ओरियन’ नाम के एक रोबोटिक डॉग को प्रदर्शित किया गया था। एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर ने इसे विश्वविद्यालय के उत्कृष्टता केंद्र में विकसित बताया था।

हालांकि, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दरअसल ‘यूनिट्री गो2’ मॉडल है, जिसका निर्माण यूनिट्री रोबोटिक्स करती है और पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल शोध एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

इस बीच, विवादों के केंद्र में रहीं प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा, ‘‘विवाद इसलिए पैदा हुआ कि चीजें संभवतः स्पष्टता से नहीं पेश की गईं और मंशा को ठीक से समझा नहीं जा सका। समय की कमी या आसपास के शोरगुल के कारण मैं वह बात नहीं कह पाई जो मैं कहना चाहती थी।’’

इस मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सवाल उठाए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय एआई समिट एक अव्यवस्थित पीआर (जनसंपर्क) तमाशा बन गई है जहां भारतीय डेटा बिक्री के लिए और चीनी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।”

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि उद्देश्य नवाचार को बाधित करना नहीं है, लेकिन प्रस्तुति भ्रामक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विवाद अन्य प्रतिभागियों के प्रयासों पर असर नहीं डालना चाहिए।

ग्रेटर नोएडा स्थित संस्थान ने अपने बयान में कहा कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग उसके शैक्षणिक प्रयासों का हिस्सा है, ताकि छात्र वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उपकरणों के माध्यम से एआई कौशल विकसित कर सकें।

निजी विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके शिक्षक और छात्र इस ‘दुष्प्रचार अभियान’ से आहत हैं लेकिन संस्थान का ध्यान छात्रों के सीखने और नवाचार पर ही रहेगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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