मुंबई, आठ अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों से उपयोग में आसान और सभी के लिए सुलभ उत्पाद डिजाइन करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह भारत को वित्तीय समावेश हासिल करने और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने में मददगार होगा।
मल्होत्रा ने ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ 2025 को संबोधित करते हुए बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मुद्दे का भी उल्लेख किया और इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास तेज करने की वकालत की।
मल्होत्रा ने एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स का हवाला देते हुए कहा, ‘‘अपने ग्राहकों के पहले से कहीं अधिक करीब पहुंचिए, इतना करीब कि उन्हें यह पता चलने से पहले ही बता दीजिए कि उन्हें क्या चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि ‘सबसे पहले ग्राहक दृष्टिकोण’ अपनाएं और ऐसे उत्पाद और सेवाएं डिजाइन करें जो उपयोग में आसान हों, सभी के लिए सुलभ हों और सहायक प्रौद्योगिकी के साथ हों, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वरिष्ठ नागरिक, सीमित डिजिटल साक्षरता वाले व्यक्ति और विशेष रूप से दिव्यांग जैसे कमजोर समूह पीछे न छूटें।’’
आरबीआई गवर्नर ने इस क्षेत्र से विश्वास और अनुपालन को प्राथमिकता देने के साथ-साथ प्रत्येक उत्पाद और सेवा में उपभोक्ताओं के लिए मजबूत ‘डाटा’ सुरक्षा, पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों को शामिल करने का भी आग्रह किया।
इसके अलावा, मल्होत्रा ने उनसे ‘स्थानीय को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक सोच’ का आह्वान किया। ‘‘अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ जुड़ें, सीख साझा करें, वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों को अपनाएं और डिजिटल वित्त के भविष्य को आकार देने में भारत की भूमिका को मजबूत करें।’’
उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को अपनाकर और भारत की डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) की अनूठी खूबियों का उपयोग करके, एक जीवंत परिवेश, डिजिटल रूप से जुड़ी आबादी, सक्षम नीतियों और गहन तकनीकी प्रतिभा के साथ, फिनटेक डिजिटल अंतर को पाट सकता है। साथ ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ नवोन्मेष को बढ़ावा दे सकता है।
मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ऐसा करके, वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां न केवल अपनी वृद्धि और समृद्धि सुनिश्चित करेंगी, बल्कि हमारे देश की वृद्धि और प्रगति को गति देने और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान देने में भी महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाएंगी।’’
उन्होंने कहा कि भारत में एक जीवंत वित्तीय प्रौद्योगिकी परिवेश है और फिनटेक उद्योग ने बड़े पैमाने पर और किफायती लागत पर वित्तीय सेवाएं प्रदान करना संभव बनाया है। देश में पिछले एक दशक में 40 अरब डॉलर से अधिक के निवेश वाली लगभग 10,000 संस्थाएं हैं।
मल्होत्रा ने कहा कि इस क्षेत्र ने अभूतपूर्व वृद्धि देखी है और भविष्य की संभावनाएं इस क्षेत्र की कई खूबियों पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे देश में कौशल और तकनीकी प्रतिभा का विशाल और समृद्ध भंडार है। दूसरा, भुगतान, ऋण, बीमा, पेंशन और धन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एक जीवंत वित्तीय परिवेश है जो इस फिनटेक नवोन्मेषण का समर्थन कर रहा है।’’
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि एकीकृत कर्ज इंटरफेस (यूएलआई) का उद्देश्य ऋणदाताओं को वैकल्पिक कर्ज मॉडल बनाने के लिए आंकड़ों के उपयोग को लेकर सक्षम बनाना है, जैसा कि भुगतान क्षेत्र में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) ने किया है।
भाषा रमण अजय
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