मुंबई, 28 अक्टूबर (भाषा) बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में वित्तीय अपराधों पर अंकुश के लिए विशेषज्ञता वाली भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में नियमों के अनुपालन से जुड़ी 19,000 से अधिक विशेषज्ञ नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। वैश्विक प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल प्रतिभा समाधान प्रदाता एनएलबी सर्विसेज ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एनएलबी सर्विसेज के भारत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वरुण सचदेवा ने कहा कि वित्तीय संस्थानों द्वारा धनशोधन रोधी (एएमएल), अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी), आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक (सीटीएफ), प्रतिबंधों के अनुपालन और लेनदेन की निगरानी से जुड़े तंत्र को मजबूत किए जाने के साथ भारत में वित्तीय अपराध अनुपालन क्षेत्र में कार्यरत लोगों की संख्या वर्ष 2030 तक बढ़कर 45,000 होने का अनुमान है। इससे 19,000 से अधिक विशेषज्ञ नौकरियां पैदा होंगी।
हालांकि, इस क्षेत्र में कुशल प्रतिभाओं की भारी कमी है। वर्तमान में कार्यबल में शामिल होने वाले पेशेवरों में से केवल 40 प्रतिशत के पास धनशोधन संबंधी जांच, अंकुशों की जांच, धोखाधड़ी के आंकड़ों का विश्लेषण, नियामकीय रिपोर्टिंग और वित्तीय अपराध से जुड़ी प्रौद्योगिकी प्रणालियों में विशेषज्ञता है।
सचदेवा ने कहा कि वित्तीय संस्थान कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निगरानी, व्यवहार विश्लेषण, मॉडल संचालन और जोखिम आधारित जांच को ध्यान में रखते हुए वित्तीय अपराध संबंधी कार्यप्रणालियों में बदलाव कर रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में जरूरी कौशल की प्रकृति भी बदल रही है।
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यासिर अजय
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