नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को ‘बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025’ पर जारी एक विस्तृत दस्तावेज में कहा कि यह विधेयक देश के बिजली वितरण क्षेत्र को वित्तीय अनुशासन, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और परिचालन दक्षता के माध्यम से मजबूत करेगा।
सरकार की तरफ से इस विधेयक के बारे में ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवालों’ (एफएक्यू) पर एक दस्तावेज जारी किया गया है। इसके मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन संघीय ढांचे को बनाए रखता है, सहकारी शासन को प्रोत्साहित करता है और बिजली क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करता है।
यह दस्तावेज विधेयक को लेकर हाल ही में उठे विवाद के बीच सामने आया है। अखिल भारतीय बिजली इंजीनियर महासंघ (एआईपीईएफ) ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा है कि यह प्रस्ताव सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के मौजूदा नेटवर्क का इस्तेमाल निजी वितरण लाइसेंसधारकों को करने की अनुमति देता है, जिससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
एआईपीईएफ के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा, “विधेयक का स्वरूप निजीकरण की मंशा को आगे बढ़ाता प्रतीत होता है। केंद्र सरकार बिजली (संशोधन) नियमों के जरिये अपने निजीकरण एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।”
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विधेयक सरकारी और निजी वितरण कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा, जो राज्य विद्युत नियामक आयोगों की निगरानी में होगी। सरकार का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा, दक्षता और वास्तविक विकल्प प्राप्त होंगे।
एफएक्यू दस्तावेज के मुताबिक, साझा नेटवर्क का उपयोग लाइन और सबस्टेशन के दोहराव को समाप्त करेगा। वर्तमान एकाधिकार वितरण व्यवस्था में तकनीकी और वाणिज्यिक हानियां अधिक होती हैं, जो अक्सर अक्षम प्रबंधन और बिजली चोरी के कारण बढ़ती हैं।
सरकार का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों, रेलवे और मेट्रो के लिए क्रॉस-सब्सिडी खत्म करने से प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा।
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