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Sunday, 8 February, 2026
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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक समीक्षा का जीडीपी वृद्धि अनुमान यथार्थवादी: भारतीय उद्योग

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नयी दिल्ली, 29 जनवरी (पीटीआई) भारतीय कंपनियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि आर्थिक समीक्षा में विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप मध्य-अवधि के सुधार और वृद्धि एजेंडा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अगले वित्तीय वर्ष के लिए 6.8-7.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान यथार्थपूर्ण प्रतीत होता है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वानुमान चालू वित्तीय वर्ष के 7.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है, जो उपभोग और निवेश से प्रेरित है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह आर्थिक समीक्षा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर भारत की व्यापक आर्थिक स्थितियों का व्यावहारिक, पेशेवर और सुव्यवस्थित आकलन प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि व्यापक आंकड़ों के आधार पर यह समीक्षा एक स्पष्ट मध्यम अवधि का सुधार और वृद्धि एजेंडा निर्धारित करती है जो विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप है।

बनर्जी ने कहा कि सीआईआई आर्थिक समीक्षा में भारत की वृद्धि संभावनाओं के आकलन से सहमत है। वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 से 7.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी चुनौतियों के बीच वास्तविक और सही लगता है।

उन्होंने कहा कि अगर महंगाई मध्यम स्तर पर बनी रहती है, तो देश को दो अंकीय नाममात्र वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे सरकार की आय बढ़ेगी और उधारी पर दबाव कम होगा और इससे वास्तविक ब्याज दरों पर भी असर पड़ेगा।

एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि जहां देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और सरकार के निवेश ने मजबूत आधार तैयार किया है, वहीं भारत की वृद्धि क्षमता को पूरी तरह से आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं में सुधार और नियमों को सरल बनाना जरूरी है। इससे व्यवसाय करने की लागत कम होगी और व्यापार को आसान बनाया जा सकेगा।

रिलायंस एमईटी सिटी (मॉडल इकोनॉमिक टाउनशिप लिमिटेड) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और पूर्णकालिक निदेशक श्रीवल्लभ गोयल ने कहा कि आर्थिक समीक्षा शहरों को केवल जनसंख्या केंद्रों के बजाय आर्थिक बुनियादी ढांचे के रूप में सही ढंग से पुनर्परिभाषित करती है।

उन्होंने कहा, ‘भारत की वृद्धि का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि हम विनिर्माण, रसद, कौशल और शहरी जीवन को एक ही परिवेश में कितने प्रभावी ढंग से एकीकृत करते हैं। यहीं पर रिलायंस एमईटी सिटी जैसे एकीकृत औद्योगिक शहरी मंच प्रासंगिक हो जाते हैं। भविष्य केवल सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन, निर्यात और रोजगार को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने पर केंद्रित होगा।’

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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