मुंबई, एक अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि प्रावधान के लिए अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) ढांचा एक अप्रैल, 2027 से सभी वित्तीय संस्थानों पर लागू करने का प्रस्ताव है। इससे वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
ईसीएल व्यवस्था लेखांकन और जोखिम प्रबंधन उपाय है, जिसमें वित्तीय संस्थानों को अपने कर्ज पर नुकसान का अनुमान लगाने और उसके लिए प्रावधान करने की आवश्यकता होती है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए ने कहा कि प्रावधान को लेकर सूझ-बूझ वाली सीमा के साथ ईसीएल रूपरेखा एक अप्रैल, 2027 से सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (लघु वित्त बैंकों को छोड़कर), भुगतान बैंकों (पीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (एआईएफआई) पर लागू करने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा, ”उन्हें जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश कम करने का वक्त (31 मार्च, 2031 तक) दिया जाएगा, ताकि उनके मौजूदा खातों पर अगर कोई उच्च प्रावधान हो तो उसके एकमुश्त प्रभाव को कम किया जा सके।”
मल्होत्रा ने कहा कि इन दिशानिर्देशों से ऋण जोखिम प्रबंधन गतिविधियों में सुधार होने और विभिन्न संस्थानों के वित्तीय विवरणों की बेहतर तुलना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भाषा पाण्डेय रमण
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