scorecardresearch
Sunday, 25 January, 2026
होमदेशअर्थजगतविदेशों में खाद्यतेलों के दाम गिरने से सभी तेल तिलहन में नरमी

विदेशों में खाद्यतेलों के दाम गिरने से सभी तेल तिलहन में नरमी

Text Size:

नयी दिल्ली, एक दिसंबर (भाषा) विदेशों में भारी मंदी से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को लगभग सभी तेल तिलहन कीमतों में नरमी रही। सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल तिलहन तथा बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट रही लेकिन उपभोक्ताओं को अभी इस गिरावट का लाभ मिलना बाकी है।

बाजार सूत्रों ने बताया कि मलेशिया एक्सचेंज में 3.5 प्रतिशत की गिरावट है। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 3.5 प्रतिशत कमजोर बंद हुआ था और फिलहाल इसमें लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द खाद्यतेलों की कोटा प्रणाली को समाप्त करना चाहिये और सस्ते आयातित तेलों की मार से देश के किसानों, तेल मिलों और उपभोक्ताओं की रक्षा करने के लिए सूरजमुखी, सोयाबीन जैसे बेहद सस्ते आयातित तेल पर आयात शुल्क अधिक से अधिक लगाने के बारे में सोचना चाहिये क्योंकि अभी सूरजमुखी बुवाई का समय है।

अगर बाजार में सस्ते आयातित तेलों की भरमार रही तो किसान तिलहन की बुवाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी अनुभव किया गया है कि जब विदेशी तेल महंगे हुए तो देशी तेल तिलहनों की वजह से स्थिति संभली थी। इसलिए तेल तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। इससे न केवल खाद्यतेल आयात पर खर्च होने वाले विदेशीमुद्रा की भारी मात्रा में बचत होगी बल्कि किसान तिलहन खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे, तेल मिलों के चलने से रोजगार बढ़ेंगे, विदेशों पर निर्भरता घटने के साथ साथ मुद्रास्फीति भी कम होगी।

पामतेल से कोई डीआयल्ड केक (डीओसी) और खल प्राप्त नहीं होता जिसकी पूरी दुनिया में मांग है। हमारे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला जैसे अधिकतर देशी तेल तिलहन से पर्याप्त मात्रा में डीओसी और खल की प्राप्ति होती है और किसान सोयाबीन की खेती भी इस कारण करते हैं कि इसके डीओसी के निर्यात से उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। सोयाबीन फसल से किसानों को तेल के अलावा लगभग 82 प्रतिशत डीओसी की प्राप्ति होती है। इसलिए आयात पर निर्भरता कम करना और देशी तेल तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कोटा व्यवस्था को समाप्त करना अहम है।

सूत्रों ने कहा कि पशुचारे और डीओसी की कमी का असर दूध, अंडा, चिकन, मक्खन आदि जैसे दैनिक उपयोग वाली वस्तुओं पर हो रहा है जिससे मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ता है। ये वस्तुयें महंगी हो रही हैं। इनकी महंगाई को रोकने के लिए भी देशी तेल तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने कि देश में सूरजमुखी के उत्पादन और पेराई के बाद तेल निकालने में लगभग 6,800 रुपये क्विन्टल का भाव बैठता है और इस प्रकार इसके तेल का थोक भाव 160 रुपये किलो बैठता है। जबकि आयातित सूरजमुखी तेल का भाव अब घटकर 1,320 डॉलर प्रति टन (लगभग 108 रुपये किलो) और सोयाबीन तेल का भाव घटकर लगभग 1,300 डॉलर प्रति टन (लगभग 107 रुपये किलो) रह गया है।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,125-7,175 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,360-6,420 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,390-2,655 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,160-2,290 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,220-2,345 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,850 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,500-5,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,310-5,360 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments