नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) विदेशी बाजारों में कारोबार के सामान्य रुख के बीच सस्ते आयातित तेलों की भरमार होने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई।
बाजार सूत्रों ने कहा कि जिस कदर सस्ते आयातित तेल से बाजार पट रहा है वह देश के तेल तिलहन उद्योग के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। सामान्य तौर पर आम लोग दाम टूटने का मतलब खाद्यतेलों के दाम सस्ता होना समझते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत देखें तो खुदरा खाद्यतेल विक्रेता कंपनियों द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) जरुरत से कहीं ज्यादा निर्धारित किये जाने के कारण उपभोक्ताओं को वैश्विक दाम में गिरावट का यथोचित लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की देश के बाजारों में आवक बढ़ने से घरेलू तिलहन उत्पादक किसानों के हाल की सोयाबीन की पैदावार, आगामी सरसों की बंपर होने वाली फसल आदि के खपने की असल चुनौती पैदा हो गई है। आयातित सस्ते तेलों पर लगाम नहीं लगा तो हमारे किसानों की फसल खपेगी नहीं और आगे वे तिलहन उत्पादन के बारे में दोबारा सोचने को विवश होंगे।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को सभी तेल कंपनियों को अपने एमआरपी के बारे में एक सरकारी वेबसाइट पर नियमित तौर पर खुलासा करने का निर्देश देना चाहिये।
इस बीच, मलेशिया एक्सचेंज में कारोबार में कोई घट बढ़ नहीं है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 0.75 प्रतिशत कमजोर बंद हुआ था और फिलहाल यहां 0.3 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।
सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन के पहले के बचे हुए स्टॉक को मिलाकर पिछले साल देश में करीब 100 लाख टन सोयाबीन स्टॉक हो गया है और आगामी करीब 125 लाख टन सरसों की फसल आने वाली है। असल सवाल यह है कि सस्ते आयातित तेलों के रहते ये फसल खपेंगी कैसे?
उन्होंने कहा कि खरीफ सत्र में तिलहन की अधिक पैदावार होती है लेकिन इस अधिक उपज देने वाले मौसम के बावजूद नवंबर दिसंबर, 2022 के सिर्फ दो महीनों में ही खाद्यतेलों के आयात में लगभग छह लाख टन की वृद्धि हुई। देश में तिलहन उत्पादन बढ़ने के बावजूद खाद्यतेलों का आयात बढ़ना चिंता की बात है।
सूत्रों ने कहा कि देशी तेल उद्योग के साथ दूध कारोबार, मुर्गीपालन जैसा व्यवसाय भी जुड़ा हुआ है क्योंकि तेल-तिलहन उद्योग से मवेशीचारे के लिए खल और मुर्गीदाने के लिए डीआयल्ड केक (डीओसी) की प्राप्ति होती है। लेकिन सभी इस सस्ते आयातित तेलों के आगे बेबस हैं।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,570-6,620 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,555-6,615 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,580 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,455-2,720 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,190-2,120 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,050-2,175 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,820 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,350 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,950 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,505-5,605 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,250-5,270 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
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